मोतिहारी। जिले के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित पताही प्रखंड क्षेत्र की पदुमकेर पंचायत में सौ वर्षों से सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल आज भी कायम है। यहां का मुहर्रम जुलूस हिदू परिवार के लोगों द्वारा पहले निकलवाया जाता है। उसके बाद ही मुस्लिम समुदाय को निकालने की इजाजत दी जाती है, वे पहलाम भी करते हैं। गांव के हिदू परिवारों की बड़ी आबादी रोजा रखती है और पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार ताजिया का जुलूस निकालते हैं। इसमें दोनों समुदायों के लोगों की सहभागिता देखते ही बनती है। मुहर्रम को लेकर यहां सभी तैयारी पारंपरिक रीति के अनुसार होती है। लोग नियमानुसार अखाड़ा सजाते हैं और इमाम हुसैन के जयकारे के साथ जुलूस निकाला जाता है। निशान लेकर दोनों समुदायों के लोग सामूहिक रूप से करतब दिखाते हैं। यहां झरनी गाते हुए फतिया भी पढ़ा जाता है और मजार पर चादरपोशी भी की जाती है। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल होती हैं।

मुहर्रम जुलूस निकालने की पुरानी परंपरा

पदुमकेर गांव में स्थित स्वर्गीय बाबू जगदीश सिंह के पूर्वज से मोहर्रम का जुलूस निकालने की पुरानी परंपरा कायम रही। इसको देखते हुए अंग्रेजी हुकूमत में अंग्रेजों ने गद्दी वालों के रूप में इनके परिवार के नामों का ताजिया जुलूस अखाड़ा के नाम से लाइसेंस निर्गत कर दिया था। वीरेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, संतोष सिंह, नन्हक सिंह आदि लोगों ने बताया कि पूर्वजों द्वारा शुरू की गई परंपरा दोनों समुदायों की एकता की मिसाल है, जो आज भी उसी रूप में कायम है।

अनंत चतुर्दशी को लेकर मोहर्रम की तिथि दो दिन बढ़ाई

इस बार भी ताजिया जुलूस की तैयारी की गई है। अंचल अधिकारी रोहित कुमार व थानाध्यक्ष विकास तिवारी ने बताया कि अनंत चतुर्दशी पर जलबोझी के कारण दोनों समुदायों के लोगों ने मिल बैठकर यह तय किया है कि इस वर्ष अनंत चतुर्दशी संपन्न होने के बाद 12 सितंबर 2019 को ताजिया जुलूस निकाला जाएगा। ताकि, वर्षों से कायम शांति और सौहार्द के बीच कोई अवांछित खलल नहीं डाल सके। वर्तमान गद्दी वाले सरपंच शिवशंकर सिंह, रितेश कुमार, जलील मियां, शाह मोहम्मद, बिदेश्वरी चौधरी, अशोक राउत, भोला बैठा ने बताया कि यह परंपरा इस गांव को अलग पहचान देती है। हमारे गांव का आयोजन क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस