दरभंगा। भादो कृष्ण पक्ष नवमी के दिन यानी 4 सितंबर को हर वर्ष की भांति बेनीपुर क्षेत्र के मकरमपुर गांव स्थित बजरंगबली मंदिर प्रांगण में एक साथ किया जाएगा हजारों ध्वजारोहण और लहराएगा बजरंग पताका। ध्वजारोहण किए जाने की परंपरा सैकड़ों वर्ष पूर्व से चली आ रही है। ध्वजारोहण किए जाने को लेकर मंदिर प्रांगण की रंगाई पुताई एवं साफ सफाई का कार्य युद्धस्तर पर ग्रामीणों की ओर से किया जा रहा है। बताते चलें कि मन्नतें पूरी होने को लेकर यहां भादो कृष्ण पक्ष नवमी के दिन भारी संख्या में पड़ोसी देश नेपाल के लोग भी आकर ध्वजारोहण करते हैं। पूर्व में यहां पर आकर पूर्व रेलमंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्र, पं. हरिनाथ मिश्र एवं सांसद कीर्ति झा आजाद भी ध्वजारोहण कर चुके हैं। वैसे तो पूरे देश में रामनवमी के अवसर पर ध्वजारोहण किये जाने की परम्परा रही है लेकिन मकरमपुर गांव ही एक ऐसा गांव हैं जहां भादव कृष्णपक्ष नवमी के दिन ध्वजारोहण किया जाता है। ध्वजारोहण का इतिहास : सीताराम चौधरी, विजय कुमार चौधरी, राम मोहन चौधरी सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों वर्ष पहले जब मकरमपुर सहित आसपास के गांवों में हैजा फैला तो दर्जनों लोगों की मौत हो गई। उस समय बजरंगबली मंदिर के पुजारी शीतल बाबा ने रात में स्वप्न देखा कि मंदिर प्रांगण में ध्वजारोहण करने से शांति मिलेगी। जिसके बाद भादो कृष्ण पक्ष नवमी के दिन मंदिर प्रांगण में ध्वजारोहण किया गया जिसके बाद से मकरमपुर गांव सहित आसपास के गांवों में हैजा की कहर थम गया और उसी दिन से ध्वजारोहण करने की परम्परा शुरू हुई जो आजतक कायम हैं। ध्वजारोहण के दिन महावीरजी को चुडा, दही, लड्डु, केला ,मिठाई आदि का भोग लगाया जाता हैं। प्रत्येक ध्वजारोहण करनेवाले तीन ब्राहमण एवं दो कुंवारी कन्याओं को भोजन करवाते हैं।

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