दरभंगा। भीषण गर्मी में सुपौल बाजार के लोगों को नियमित तौर पर शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) की अनदेखी के कारण पांच साल पहले बने पानी टंकी से नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। इससे नगर पंचायत के लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।

बताते हैं कि सुपौल बस स्टैंड के समीप पानी टंकी के निर्माण व अन्य कार्यों पर तीन करोड़ 33 लाख रुपये खर्च किए गए। उद्देश्य लोगों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति कराना था। स्थानीय लोगों के मुताबिक टंकी निर्माण के साथ कुछ दिनों तक जलापूर्ति सुचारु रूप से हुई। कुछ महीनों बाद से कभी मोटर में खराबी तो कभी पाइप से पानी लीकेज जैसी समस्याएं जलापूर्ति में बाधक बनने लगीं। पानी टंकी की देखरेख उचित तरीके से नहीं हो पा रही है। कैंपस पर भी लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

अनुमंडल के लगभग छह प्रखंडों के लोग अपने व्यावसायिक कार्यो से बाजार में आते हैं। इस उमस भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप में उन्हें पानी की परेशानी झेलनी पड़ती है। बाजार से बंद बोतल पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझाते हैं। टंकी की मरम्मत के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है, जबकि नगर पंचायत के वार्ड संख्या तीन, चार, पांच, छह, सात, आठ व नौ में इस पानी टंकी से जलापूर्ति का समय भी निर्धारित है। सुबह छह बजे से आठ बजे, दोपहर 12 बजे से दो बजे और शाम पांच बजे से सात बजे तक जलापूर्ति का समय निर्धारित है। कुल मिलाकर जलापूर्ति की कुल अवधि छह घंटे है, जिसमें मुश्किल से दो से तीन घंटे ही कभी कभार पानी की सप्लाई होती है। बाजार में जर्जर पाइप बिछाने से पानी सप्लाई के बाद बाजार के विभिन्न मोहल्लों में जलजमाव हो जाता है।

नगर पंचायत के वार्ड संख्या-छह के निवासी मुन्ना चौधरी बताते हैं कि महीने में दस दिन पानी बंद रहता है। मो नौशाद ने बताया कि जब से जलमीनार का निर्माण किया गया तब से एक बार भी इसकी सफाई नहीं कराई गई है। लोग गंदा पानी पीने को विवश हैं। बालकृष्ण आचार्य ने बताया कि जगह-जगह पाइप फूटने के कारण पानी रिसते रहता है। इससे संक्रमण का खतरा है। सुधीर झा व अशोक झा बताते हैं- जब इस भीषण गर्मी में शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा तो टंकी का क्या फायदा।

Edited By: Jagran