दरभंगा। मैट्रिक परीक्षा के दूसरे दिन मंगलवार को जब परीक्षार्थी अपने-अपने परीक्षा केंद्र पर प्रवेश कर रहे थे, तो जाते-जाते भी अभिभावकों की ओर देखना नहीं भूल रहे थे। कारण था कि शुष्क व कठिन समझे जाने वाले गणित विषय की परीक्षा थी। जो बच्चे अपने स्कूल से बाहर जीवन में पहली बार किसी दूसरे स्कूल में परीक्षा देने आए थे, उनमें घबराहट थी। उत्सुकता थी। लेकिन, जब वही बच्चे साढे़ बारह बजे दोपहर में केंद्र से निकले तो मुस्कुरा रहे थे। माथे पर सफलता की चमक थी। प्रथम पाली में ही जिले के सभी 47 केंद्रों पर कुल 671 परीक्षार्थी विभिन्न कारणों से परीक्षा देने नहीं आ सके। लेकिन, हड़ताली शिक्षकों का आह्वान मैट्रिक के परीक्षा पर दूसरे दिन भी कोई प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा। जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ. महेश प्रसाद सिंह ने विभिन्न केंद्रों के निरीक्षण के बाद दावा किया कि शहर के अलावा बेनीपुर एवं बिरौल अनुमंडल मुख्यालयों में भी प्रारंभिक शिक्षक अपनी शिक्षक की ड्यूटी बजा रहे हैं। आरक्षित श्रेणी के शिक्षकों को भी अभी तक ड्यूटी नहीं मिली है। कहीं, आवश्यकता ही नहीं पड़ी कि आरक्षित श्रेणी के शिक्षकों को ड्यूटी लगाई जाए।

हालांकि, सर्वोदय स्कूल परीक्षा केंद्र पर कुछ छात्रों ने शिकायत किया कि उन्हें पेयजल में कठिनाई हुई है। कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए प्रसिद्ध दरभंगा को इस बार भी उसी श्रेणी में रखने के लिए प्रशासनिक पदाधिकारी भी पीछे नहीं थे।

Posted By: Jagran

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