दरभंगा राज की विरासत में फिर लौटी रौनक, महराजीपुल का राधा-कृष्ण मंदिर बना आस्था का केंद्र
दरभंगा में इस्कान ने महाराज कुमार गुणेश्वर सिंह द्वारा निर्मित राधा-कृष्ण मंदिर का जीर्णोद्धार कर उसे आध्यात्मिक केंद्र में बदल ...और पढ़ें

राधा-कृष्ण मंदिर व तैयार किए जा रहे हाइड्रोलिक रथ। सौ. इस्कान
HighLights
इस्कान ने दरभंगा के राधा-कृष्ण मंदिर को नया जीवन दिया।
16 जुलाई को मिथिला की सबसे बड़ी जगन्नाथ रथ यात्रा।
3 करोड़ के बजट से बनेगा भव्य आध्यात्मिक केंद्र।
मुकेश कुमार श्रीवास्तव, दरभंगा । शुभंकरपुर महराजीपुल स्थित दरभंगा राज के महाराज कुमार गुणेश्वर सिंह की ओर से बनवाए गए राधा-कृष्ण मंदिर को इस्कान ने संरक्षित किया है। पांच साल में इसकी रंगत बदल गई। इसका एक भाग बागमती नदी और दूसरा मंदिर परिसर के बगीचे की ओर है।
मंदिर में भगवान का स्थान पहली मंजिल पर है। घुमावदार सीढ़ी से लोग ऊपरी मंजिल पर पहुंचते हैं। पहली मंजिल पर ही बगीचा भी है। पांच बीघा का यह परिसर श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यह शहर के सबसे शांत स्थलों में से एक है।
मंदिर दर्शन के दौरान पर्यटक आसपास के गांवों और क्षेत्रों का भी भ्रमण करते हैं। रविवार के दिन को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। भागवत गीता के प्रवचन और भंडारा प्रसाद निरंतर चलता है। इस वर्ष जन्माष्टमी पर 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद को देखते हुए अभी से तैयारी है।
मिथिला की सबसे बड़ी रथ यात्रा की तैयारी
मंदिर से इस वर्ष 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाएगी। इसे मिथिला की सबसे बड़ी रथयात्रा बनाने की तैयारी है। इसमें सबसे बड़ा आकर्षण 40 फीट ऊंचे हाइड्रोलिक रथ पर सवार भगवान होंगे। इसके रंग-रोगन और साज-सज्जा का काम चल रहा।
इसे आवश्यकता के अनुसार ऊंचाई को छोटा या बड़ा किया जा सकता है। बिजली तार, खंभे आदि की बाधा पर रथ की ऊंचाई को कम किया जाएगा। इसमें रूस, चीन, नेपाल आदि देशों से भी भक्त भाग लेने के लिए पहुंचेंगे।
मंदिर के प्रबंधक लक्ष्मण कृपादास के अनुसार, आकर्षक रथ पर सवार होकर श्रीश्रीजगन्नाथजी, बलदेवजी और सुभद्रा महारानी नगर भ्रमण करेंगे और सभी भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान की महाआरती भी की जाएगी। इसकी शुरुआत नेहरू स्टेडियम से की जाएगी।
नशे के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम
राधा-कृष्ण मंदिर में इस्कान की ओर से नशे के खिलाफ भी मुहिम चलाई जा रही। पांच वर्ष पहले वीरान पड़े इस परिसर पर नशेड़ियों का कब्जा होता था। धीरे-धीरे आध्यात्मिक चेतना का प्रवाह करने के साथ ही नशे के खिलाफ यहां से मुहिम चलाई गई।
नशारोधी जागरूकता अभियान के तहत दर्जन से अधिक युवा लाभ उठा चुके हैं, जो नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे। मंदिर में आने वाले भक्तों की सेवा में लीन रहते हैं।
तीन करोड़ के बजट से बनेगा आध्यात्मिक केंद्र
मंदिर की ओर से परिसर में आध्यात्मिक केंद्र बनाने की योजना है। तीन करोड़ रुपये के बजट से पूरे परिसर को विकसित किया जाएगा।
मंदिर और इससे जुड़े भवनों को संरक्षित कर इसे भव्य दार्शनिक स्थल बनाने और मेगा किचन, चहारदीवारी, बागमती नदी में नौका विहार, गोशाला आदि प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
