विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दरभंगा के तीन ऐतिहासिक तालाबों पर कानूनी संग्राम, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी

Published: Mon, 13 Jul 2026 08:39 AM (IST)

दरभंगा के ऐतिहासिक दिग्घी, गंगा सागर और हराही तालाबों की सुरक्षा और अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

HighLights

  1. दरभंगा के ऐतिहासिक तालाबों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई।

  2. सौंदर्यीकरण के नाम पर तालाबों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप।

  3. अतिक्रमण और निर्माण से पर्यावरण, जैव विविधता पर प्रतिकूल असर।

डिजिटल डेस्क, दरभंगा। शहर के ऐतिहासिक दिग्घी, गंगा सागर और हराही तालाबों की सुरक्षा एवं कथित अतिक्रमण के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। तालाब बचाओ अभियान के संयोजक नारायणजी चौधरी की ओर से दायर याचिका पर करीब तीन माह से सुनवाई चल रही है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित है। वहीं इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), कोलकाता में भी सुनवाई चल रही है, जिसकी अगली तिथि 23 जुलाई तय है।

सौंदर्यीकरण के नाम पर मूल स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सौंदर्यीकरण परियोजना के नाम पर तालाबों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। बिहार शहरी विकास निगम द्वारा तालाबों के कुछ हिस्सों को भरकर कियोस्क, रेस्तरां, फुटपाथ और अन्य संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे जलाशयों का अस्तित्व और उनका प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है।

तालाबों का निर्माण दरभंगा राज ने कराया था

अभी दिग्घी तालाब का रकबा 112 बीघा 10 कट्ठा है। हराही 62 बीघा 10 कट्ठा और गंगा सागर का रकबा 78 बीघा दो कट्ठा 10 धूर है। तीनों तालाबों के एकीकरण के बाद इनका रकबा करीब 230 एकड़ हो जाएगा।

दरभंगा राज की ओर से बनवाए गए तीनों तालाब वैसे तो नहर के जरिए एक-दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन अतिक्रमण के चलते इनकी स्थिति ठीक नहीं है। 12 जनवरी 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रगति यात्रा के दौरान तीनों तालाबों को एकीकृत कर सुंदरीकरण की योजना का शिलान्यास किया था।

पुराने स्वरूप में बहाली की उठी मांग

तालाब बचाओ अभियान से जुड़े पर्यावरणविद एकलव्य प्रसाद का कहना है कि तालाबों में भराव और निर्माण कार्य से उनकी प्राकृतिक जलधारण क्षमता तथा स्वयं जल शुद्ध करने की प्रक्रिया प्रभावित होगी। इससे जलीय जीव-जंतुओं, पक्षियों और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। याचिका में वर्ष 1868 और 1960 के राजस्व अभिलेखों के अनुसार तालाबों को उनके मूल स्वरूप में बहाल करने तथा सभी अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है।

'तालाबों का शहर' से सिमटती जल विरासत

नारायणजी चौधरी के अनुसार, वर्ष 1964 में दरभंगा को "तालाबों का शहर" कहा जाता था। उस समय शहर में लगभग 350 तालाब थे, जबकि अब इनकी संख्या 100 से भी कम रह गई है। तीनों विवादित तालाबों का कुल क्षेत्रफल लगभग 253 बीघा था, जिसमें 25 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर अतिक्रमण या निर्माण होने का दावा किया गया है।

भूजल और जैव विविधता पर बढ़ता खतरा

रिटायर्ड प्रोफेसर विद्यानाथ झा का कहना है कि तालाबों का क्षेत्र कम होने से भूजल पुनर्भरण, जल संरक्षण और प्राकृतिक जल शुद्धिकरण की क्षमता प्रभावित होगी। वहीं प्रोफेसर सैयद शमीम अहमद के अनुसार, वर्ष 1980 में किए गए अध्ययन में 108 तालाबों में 88 प्रजातियों के पक्षियों का रिकॉर्ड मिला था, लेकिन लगातार तालाबों के समाप्त होने से जैव विविधता और भूजल दोनों पर गंभीर असर पड़ा है।

'तालाब बचेंगे तो पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा'

पर्यावरणविदों का कहना है कि तालाबों का संरक्षण केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए। इनके संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र, जल गुणवत्ता, जैव विविधता और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

यह भी पढ़ें- दरभंगा में कोसी का बढ़ने लगा जलस्तर, 2024 जैसे हालात की याद से सहमे तटबंध किनारे के गांव