दरभंगा। का¨सदसंविवि में शिक्षक दिवस समारोह में बुधवार को अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. सर्व नारायण झा ने कहा कि विलुप्त हो चुकी शास्त्रार्थ परंपरा को पुनर्जीवित करना समाज एवं देश हित में जरूरी है। इसे जारी रखने से संस्कृत एवं संस्कृति दोनों पुष्पित व पल्लवित होगी। शास्त्रार्थ दोनों का सशक्त वाहक है। संस्कृत में छात्रों की कमी है। लेकिन, दो चार छात्रों को ही लेकर अगर नियमित रूप से एक- एक शिक्षक ईमानदारी से मेहनत करेंगे तो वही छात्र देश स्तर पर नाम करेगा। इससे अपने विश्वविद्यालय की भी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और शिक्षकों का भी मान ऊंचा होगा। प्रोवीसी प्रो. चंद्रेश्वर प्रसाद ¨सह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा पद्धति के जन्मदाता थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन। उनकी भावनाओं एवं इच्छाओं के अनुरूप ही शिक्षकों को छात्रों के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। शब्दों के संयोग से अर्थ निर्णय पर शास्त्रार्थ

मौके पर साहित्य विषय शब्दों के संयोग से अर्थ का निर्णय पर शास्त्रार्थ हुआ। शास्त्रार्थी थे साहित्य विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. नंदकिशोर चौधरी और डॉ. प्रसेनजित सूत्रधर। दोनों की प्रस्तुति को वीसी समेत अन्य विद्वानों ने मुक्त कंठ से सराहा। पूर्व पक्ष का दायित्व डॉ. सूत्रधर एवं उत्तर पक्ष का निर्वहन डॉ. चौधरी ने अपना विचार रखा। शास्त्रार्थ की समीक्षा प्रो. सुरेश्वर झा ने की। कार्यक्रम में अमरनाथ शर्मा, मन्नू कुमारी ने मुख्य रूप से सहयोग किया।

शिक्षक हुए सम्मानित उत्कृष्ट कार्य करने के लिए शिक्षक दिवस समारोह पर कुलपति एवं प्रतिकुलपति के हाथों पांच कर्मी सम्मानित किए गए। सम्मानित होने वालों में ज्योतिष विभाग के सेवानिवृत शिक्षक डॉ. गंगेश ठाकुर, साहित्य विभाग की अध्यक्ष डॉ. मीना कुमारी, शिक्षक पदाधिकारी धर्मशास्त्र विभाग के प्रो. श्रीपति त्रिपाठी, एफए मंतोष राय मालाकार, परीक्षा विभाग के सहायक धर्मनाथ मिश्र, निम्न वर्गीय लिपिक महावीर प्रसाद शामिल हैं। अनुपस्थित रहने के कारण एफए को छोड़कर सभी को पाग चादर के साथ मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। सभी ने कार्यक्रम को संबोधित भी किया और शिक्षकों के कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। विधि पदाधिकारी डॉ. नवीन कुमार झा ने भी शिक्षा में गिरते मानवीय मूल्यों एवम चारित्रिक गुण-दोषों को विस्तार से रेखांकित किया। संचालन परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार मिश्र ने किया। मंगलाचरण अखिलेश झा एवं डॉ. पुरेंद्र वारिक ने किया। स्वागत भाषण डॉ. दिलीप कुमार झा एवं धन्यवाद ज्ञापन डीन प्रो. शिवाकांत झा ने किया। मौके पर पीआरओ निशिकांत समेत अन्य गणमान्य मौजूद थे।

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