दरभंगा। एपीएम थाना क्षेत्र के होरलपट्टी- अशोक पेपर मिल जाने वाली मुख्य पथ के लचका नंबर-दो के समीप साइकिल सवार आठवीं की छात्रा रंजन कुमारी (15) को ट्रक ने कुचल डाला। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जबकि साइकिल पर पीछे बैठे उसकी फुफेरी बहन चंदा कुमारी साइकिल से गिर जाने से बाल-बाल बच गई। इधर ट्रक खड़ी कर चालक भाग गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची एपीएम थानाध्यक्ष शिव कुमार प्रसाद ने शव को अपने कब्जे में लेकर अंत्यपरीक्षण के लिए डीएमसीएच भेज दिया। वहीं ट्रक को जब्त कर लिया। देर शाम आक्रोशित लोगों ने अशोक पेपर मिल मुख्य पथ में हायाघाट थाना की पुलिस एवं उसके गाड़ी को निशाना बनाया। हायाघाट थाने की गाड़ी पर हमला कर दिया। एएसआइ मंजर आलम एवं चालक के साथ धक्का मुक्की की। एएसआइ की कमीज फाड़ डाली। सैकड़ों आक्रोशित लोगों के बीच से एएसआइ आलम जैसे-तैसे जान बचाकर भागे।

बताया जाता है कि रामपुर पतोर गांव के फूलेश्वर मुखिया की पुत्री रंजन कुमारी मध्य विद्यालय आनंदपुर की आठवीं की छात्रा थीं।मंगलवार की दोपहर अपने घर रामपुरा पतोर से साइकिल पर सवार हो रक्षाबंधन दिन राखी बांधने आए अपनी फूआ की पुत्री चंदा कुमारी को उसके घर अकराहा उत्तरी गांव पहुंचाने जा रही थी। अशोक पेपर मिल मुख्य पथ के लचका नंबर दो के समीप पीछे से आ रही ट्रक ने कुचल दिया। घटना से

आक्रोशित लोगों ने अशोक पेपर मिल मुख्य पथ को बांस-बल्ला लगाकर जाम कर दिया। दूसरी ओर आक्रोशित सैकड़ों लोगों ने लहेरियासराय-बहेड़ी मुख्य पथ को होरलपट्टी चौक पर बांस-बल्ला एवं टायर जलाकर घंटों जाम रखा। जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। आक्रोशित लोग मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने, एक परिजन को नौकरी देने, ट्रक मालिक एवं चालक पर प्राथमिकी दर्ज करने, एसएसपी और डीएम की बुलाने की मांग कर रहे थे। मौके पर पहुंचे पंचायत सचिव ने पारिवारिक लाभ के तहत परिजन को बीस हजार रुपये नकद दिया। सीओ विमल कुमार कर्ण ने आक्रोशित लोगों को समझाया।

मौके पर एपीएम थानाध्यक्ष शिवकुमार प्रसाद एवं पतौर ओपी प्रभारी धीरेंद्र ¨सह पुलिस बल के साथ कैंप किए रहे। घटना के बाद से रामपुर पतोर गांव मर्माहत घटना को लेकर पूरा रामपुरा पतोर गांव मर्माहत है। हादसे की जानकारी जैसे ही घर वालों को मिली देखते ही देखते पूरे गांव में कोहराम मच गया। रंजन के घर वालों को क्या मालूम था कि जिस उमंग के साथ वह अपनी फूआ की पुत्री चंदा को उसके घर साइकिल से लेकर अकराहा उत्तरी गांव छोड़ने जा रही है वह कभी लौटकर नहीं आएगी और कुछ ही देर में हमेशा-हमेशा के लिए भगवान को प्यारे हो जाएगी। पाल-पोसकर बड़ा करने वाली वयोवृद्ध दादी काला देवी के आंखों के आंसू भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था। वे बार-बार कह रही थी कि हे भगवन हमरा उठा लेतौ हमर पोती त ¨जदा रहत इतना कहते ही वह बेसुध हो जाती। वे भगवान को कोस रही थी जिस बच्ची को प्यार से पाला, उसी का मरा मुंह देखकर उसका कलेजा जवाब दे रहा था। मां निरमा देवी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जो बेटी अपने घर के आंगन में खाना खाकर गई वह मुझे छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए चली गई। मां की चीख-पुकार सुनकर ढांढस बंधाने पहुंचे लोगों का कलेजा भी काम नहीं कर रहा था। सभी की आंखों में आंसू बह रहे थे। गांव की महिलाएं एवं पुरुष परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास करते रहे, पर इसका निरमा पर कोई असर नहीं पड़ रहा था। वृद्ध दादा देबू मुखिया एक कोने में बेसुध पड़ा था। बताते चलें कि रंजन सात भाई-बहनों में चौथी नंबर पर थी।

Posted By: Jagran