दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय एवं श्यामा मंदिर न्यास समिति के संयुक्त तत्वावधान में विविध धर्म व अध्यात्म विषय पर कार्यशाला हुई। कार्यशाला के तीसरे दिन सोमवार को आधार पुरुष व्याकरण के विद्वान व साहित्य अकादमी से पुरस्कृत डॉ. शशिनाथ झा ने कहा कि धर्म व अध्यात्म ही तो मूल रूप से भारतीय संस्कृति का आधार है। इसी धार्मिक व आध्यात्मिक अवधारणाओं के कारण भारत विश्व गुरु कहलाया था।

कहा कि चूंकि मानव भौतिक शरीरधारी है, इसलिए सांसारिक आधारित आध्यात्म आज के लिए ज्यादा उपयोगी है। जगदंबा योगमाया समस्त प्रकृति की मूल में है। ऐसे में स्वाभाविक है कि अध्यात्म का मूल भी वे ही हैं। डॉ. झा ने निष्कर्षत: कहा कि भौतिकता एवं दैविकता से युक्त अध्यात्म ही लोकोपयोगी है। व्याख्यान के बाद डॉ. राघव झा ने भागवत के दुर्गा प्राकट्य प्रसंग पर कथा का विस्तार किया व प्रो. विद्येश्वर झा ने विचारो का सारांश प्रस्तुत करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। डॉ. चौधरी हेमचन्द्र राय के संचालन में आयोजित कार्यशाला के सह संयोजक प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने विषय प्रवर्तन किया एवं डॉ. राजेश्वर पासवान ने अतिथियों का स्वागत किया। मौके पर विनोद कुमार, दयाकांत मिश्र, विद्यानन्द मिश्र, डॉ. रामनारायण मिश्र समेत कई भक्तजन मौजूद थे।

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Posted By: Jagran

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