दरभंगा। वरीय अधिवक्ता जयानंद झा नहीं रहे। दरभंगा विधि मंडल ने फौजदारी कानून के एक प्रखर और सुविख्यात सितारे को खो दिया। सोमवार की शाम चार बजे हरिद्वार में उनका निधन हो गया। यह सूचना मिलते ही पूरे विधि मंडल में शोक की लहर छा गई। फौजदारी कानून के लिए पूरे मिथिलांचल में स्तंभ माने जाने वाले अधिवक्ता के निधन को अपूरणीय क्षति माना जा रहा है जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। उनका अंतिम संस्कार हरिद्वार में ही कर दिया गया। बताते हैं कि पं. झा लंबे समय से बीमार चल रहे थे और अपने बड़े पुत्र के साथ कोलकाता में इलाजरत थे। इसी क्रम में उन्होंने अपने पुत्र मोहन कुमार झा को हरिद्वार लेकर चलने को कहा। जहां उनका निधन हो गया। वे अपने पीछे तीन पुत्र मोहन,संतोष और शीतल झा समेत भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। जया बाबू के निधन की सूचना पाते ही दरभंगा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविशंकर प्रसाद की अध्यक्षता में मंगलवार को सभा आयोजित कर वकीलों ने अधिवक्ता जयानंद झा एवं रामकुमार रमण को श्रद्धांजलि अर्पित की। दिवंगत वकीलों के सम्मान में किसी भी प्रकार का न्यायिक कार्य नहीं करने का निर्णय लिया। इसकी सूचना महासचिव कृष्णकुमार मिश्र ने सभी अदालतों को भेज दी। शोक सभा में अधिवक्ता अमरेन्द्र नारायण झा, हेमंत कुमार, विजय नारायण चौधरी, जीतेंद्र नारायण झा,कौशर इमाम हाशमी, विनय कुमार ¨सह,सियाराम यादव,पूर्व पीपी सत्यनारायण यादव,अब्मादुल मालिक खां,सुधीर कुमार झा,देवेंद्र कर्ण, पवन कुमार चौधरी, रतन कुमार झा उर्फ बब्लू, राजीव रंजन ठाकुर उर्फ बाला जी, संतोष कुमार सिन्हा, रामवृक्ष सहनी,भवनाथ मिश्रा, दिलीप कुमार चौधरी, दीनबंधु मिश्र, कुमार उत्तम, अचलेन्द्र नाथ झा, विनोद ¨सह, नन्द किशोर चौधरी राधा कुमारी, अनीता आनंद सहित सैकड़ों अधिवक्ताओं ने गहरी शोक संवेदना प्रकट की है।

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