दरभंगा। इस तस्वीर को देखने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सफर करना इन दिनों कितना मुश्किल हो गया है। भीड़ की वजह से दुर्गा पूजा में घर आए लोगों की वापसी मुश्किल हो रही है। सभी ट्रेनों में सीट फुल हैं। यात्री सफर करें तो कैसे? यह बताने वाला कोई नहीं है। हालात यह है कि सैकड़ों यात्री रोजाना स्टेशन से वापस हो रहे हैं। परदेश जाने वाले लोगों की भीड़ के सामने सभी ट्रेनें छोटी पर रही हैं। कंफर्म टिकट की बात तो दूर तत्काल टिकट के लिए भी लोग मारामारी कर रहे है। शुक्रवार को रेलवे स्टेशन का ²श्य मेला जैसा बना रहा। सामान्य टिकट काउंटर से टिकट लेना भी मुश्किल था। टिकट लेने के लिए बाहरी परिसर तक लंबी लाइन लगी रही। काफी मशक्कत के बाद लोगों को टिकट मिल पा रहा था। टिकट मिलने के बाद यात्री ट्रेन में नहीं चढ़ पा रहे थे। सामान्य बोगी में चढ़ना जंग जीतने से कम नहीं था। मेन गेट से अंदर जाना मुश्किल था। स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस का हालत देख कई यात्रियों ने अपनी यात्रा रद कर दी। कोई बाथरूम में खड़ा था, तो कई पायदान पर लटके हुआ था। बावजूद लोग सफर करने को मजबूर थे। सबसे बुरा हाल अमृतसर जाने वाली जननायक एक्सप्रेस का था। बर्थ के लिए यात्रियों ने वाशिपीट में ही ट्रेन पर कब्जा जमा लिया। उम्मीद से अधिक यात्रियों की भीड़ हो जाने के कारण मारामारी की स्थिति हो गई। सूचना मिलते ही आरपीएफ को मोर्चा संभालना पड़ा। इसके बाद क्षमता अनुसार बोगियों को खाली कराया गया। तब जाकर स्थिति सामान्य हो पाई और आरपीएफ ने राहत की सांस ली। यहीं हाल मुबंई जाने वाली पवन एक्सप्रेस का था। चारों ओर यात्रियों का हो-हल्ला हो रहा था। लेकिन, सफर करने को कोई दूसरा उपाय नहीं था। कई यात्रियों ने जान जोखिम में डाल कर यात्रा की। टिकट वापसी भी मुश्किल थी। भीड़ अधिक रहने के कारण कई यात्रियों का टिकट वापस नहीं हो सका। समदपुरा के रामविनोद झा, जाले के रामदयाल साह, बहेड़ा के शंकर चौधरी, बहेड़ी के वचन यादव, बस्तबाड़ा के मो. रहमान, बलिया के अजय यादव, जलवार के मनीष ठाकुर आदि ने रेलवे की व्यवस्था पर आक्रोश व्यक्त किया। आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रेन में जब जगह उपलब्ध नहीं है तो रेलवे टिकट के नाम पर राशि क्यों वसूली जा रही है। कई यात्रियों ने कहा कि परदेश में प्राइवेट काम करते हैं, अगर समय पर नहीं पहुंचे तो तो काम से हटा दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में हमारे परिवार का क्या होगा।

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Posted By: Jagran

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