दरभंगा। जिला युवा जदयू के महासचिव मो. सैफ उर्फ मुन्ना की गोली मारकर हत्या और शव सहित उसकी स्कॉर्पियो को उड़ाने के मामले में पुलिस ने तीसरे दिन गुरुवार को फरार आरोपित को भी दबोच लिया। पूछताछ दौरान उसने घटना के संबंध में कई राज का खुलासा किया। एसएसपी बाबूराम ने बताया कि गिरफ्त में आए औलियाबाद निवासी मो. अलीम के पुत्र मो. रब्बानी को हायाघाट से पकड़ा गया। उसने बताया कि इस मामले को चार लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था। इसमें तीन की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। जबकि, रब्बानी फरार चल रहा था। इसे पकड़ने के बाद सभी आरोपितों को एक साथ रखकर पूछताछ की गई। ताकि, अनुसंधान में कोई कमी नहीं रहे। रब्बानी ने बताया कि इस वारदात का मुख्य साजिशकर्ता उसके गांव का ही मो.अमीरुल है। वर्ष 2013 में हुई हत्या मामले में उसे मो.सैफ ने फंसा दिया था। वहीं एक वर्ष पूर्व अमीरुल के मर्जी के खिलाफ उसकी बहन की शादी करा दी थी। इससे अमीरूल हमेशा बदला लेने के फिराक में रहता था। इस बीच तीन पूर्व रब्बानी की बहन गायब हो गई। इसका शक मो.सैफ पर हुआ, लेकिन उसकी पहुंच के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराई। इसके बाद बदला लेने का प्लान बनाने लगा। इसी दौरान अमीरुल भी साथ आया और फिर दोनों प्लान के अनुसार घटना को अंजाम देने के लिए में जुट गए। एसएसपी ने बताया कि दोनों ने मो.सैफ के चालक व विलासपुर गांव निवासी रिजवान खां को एक लाख रुपये देने का लालच देकर मिला लिया। इस मामले में बहादुरपुर थाना क्षेत्र के असगांव निवासी अल्लाउद्दीन को शव और गाड़ी छिपाने में सहयोगी बनाया। एसएसपी ने बताया कि इस मामले के सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सभी के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाया जाएगा। ताकि, सभी को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।

तीन दिनों में पूरे मामले का पर्दाफाश : एसएसपी ने बताया कि इस मामले को पुलिस ने तीन दिन के अंदर सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर पूरे मामले की पर्दाफाश कर दिया है। इसमें बेहतर काम करने वाले पुलिस कर्मियों को पुरस्कृत किया जाएगा। मौके पर नगर एसपी योगेंद्र कुमार, सदर एसडीपीओ अनोज कुमार सहित कई थाने के पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

चालक ने की थी पुलिस को गुमराह करने की कोशिश :

दरअसल, घटना को अंजाम देने के बाद मो.सैफ के चालक रिजवान खां पुलिस को काफी देर तक गुमराह करता रहा। कभी शव सहित गाड़ी को सोनकी की ओर उड़ा लिए जाने तो कभी स्थानीय एक व्यक्ति का नाम लेकर उसे फंसाने की बात कहता था। इधर, घटना को लेकर आक्रोशित लोगों ने एपीएम थाना के पास सड़क को भी जाम कर दिया था। चालक बार-बार अपना बयान बदलता रहा, लेकिन जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि मो.सैफ के गांव के ही अमीरूल और रब्बानी के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया है। दोनों के लिफ्ट मांगने पर वह हायाघाट चौक के पास मृतक ने अपनी गाड़ी के बीच वाले सिट पर बैठा लिया। योजना अनुसार एपीएम थाना के होरलपट्टी के पास पीछे से अमीरूल ने आगे की सिट पर बैठे शैफ उर्फ मुन्ना को गोली मार दी। सभी मृतक को बीच वाली सीट पर लिटा दिया। फिर दोनों बदमाशों ने चालक की मदद से गाड़ी सहित शव को असगांव निवासी अल्लाउद्दीन की मदद अब्दुल्लाहपुर चौक के पास छिपा दिया। गाड़ी को कवर से ढक दिया गया। पुलिस ने चालक की मदद से घटना के देर शाम मृतक की काली रंग की स्कॉर्पियो बीआर 07पी-0786 को बरामद कर ली । उसके अंदर से सैफ का शव भी पाया गया। साथ में गाड़ी से मृतक का एक लाख 32 हजार रुपये भी बरामद कर लिए गए। दूसरे दिन बुधवार को पुलिस ने पटना में छापेमारी कर अमीरुल और अल्लाउद्दीन को लोडेड पिस्टल के साथ दबोच लिया। दोनों दिल्ली भागने के फिराक में थे।

Posted By: Jagran

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