दरभंगा के मुकेश मिश्रा ने कराटे में राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम किया रोशन
दरभंगा निवासी मुकेश मिश्रा को नई दिल्ली में आयोजित पांचवीं कियो राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता-2026 के लिए आयोजन समिति सदस्य चुना ...और पढ़ें

दिल्ली में सम्मानित होते दरभंगा के मुकेश मिश्रा।
HighLights
मुकेश मिश्रा राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता आयोजन समिति सदस्य बने।
दरभंगा में कराटे अकादमी स्थापित कर हजारों छात्रों को प्रशिक्षित किया।
बिहार कराटे टीम के वरिष्ठ कोच और राज्य संघ के संयुक्त सचिव।
जागरण संवाददाता, दरभंगा । दरभंगा जिले के भेरोपट्टी निवासी मुकेश मिश्रा ने कराटे के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट योगदान से बिहार का नाम पूरे देश में रोशन किया है।
उन्हें 26 फरवरी से 01 मार्च तक नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में आयोजित पांचवीं कियो राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता-2026 में बिहार से कराटे इंडिया आर्गेनाइजेशन द्वारा आयोजन समिति सदस्य के रूप में चुना गया है।
इस प्रतियोगिता में 28 राज्यों के खिलाड़ियों के साथ-साथ सर्विसेज स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और असम राइफल्स के चयनित खिलाड़ियों सहित लगभग एक हजार प्रतिभागियों ने भाग लिया।
मुकेश एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता, इंद्रकांत मिश्रा, बिहार पुलिस से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माता, सविता मिश्रा, गृहिणी हैं।
पारिवारिक संस्कार और अनुशासन ने उन्हें बचपन से ही अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहना सिखाया। महज 14 वर्ष की आयु में कराटे की शुरुआत करने वाले मुकेश ने प्रशिक्षक अनीकेत गुप्ता के मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष 2008 से 2016 तक वे देशभर में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सक्रिय रहे और अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
वर्ष 2017 में मुकेश ने दरभंगा में कराटे अकादमी की स्थापना की। वर्तमान में वे बिहार कराटे टीम के वरिष्ठ कोच हैं और स्टेट कराटे एसोसिएशन आफ बिहार के संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं।
यह संस्था कराटे इंडिया ऑर्गेनाइजेशन द्वारा अधिकृत बिहार की राज्य इकाई है, जो राज्य में कराटे खेल का संचालन करती है।
मुकेश ने लगभग पांच हजार स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थियों, विशेषकर बालिकाओं, को कराटे और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया है। उनके प्रयासों से कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
मुकेश का यह योगदान न केवल कराटे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह युवाओं को आत्मरक्षा और अनुशासन के महत्व को समझाने में भी सहायक है।
उनके कार्यों से यह स्पष्ट होता है कि समर्पण और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। मुकेश मिश्रा की उपलब्धियां बिहार के लिए गर्व का विषय हैं और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
