दरभंगा में मां बनने अस्पताल पहुंची अंजली, अर्थी पर घर लौटी; नवजात भी नहीं बचा
दरभंगा के बहेड़ी में एक अवैध अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो ...और पढ़ें

अंजली की फाइल फोटो व रोते बिलखते स्वजन।
HighLights
बहेड़ी के अवैध अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत।
अवैध अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, संचालक फरार, अस्पताल सील।
ग्रामीण चिकित्सक की सलाह पर अवैध अस्पताल में भर्ती हुई थी।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। बहेड़ी थाना क्षेत्र के बहेड़ी-रोसड़ा मुख्य मार्ग में पीएनबी के पास संचालित एक अवैध अस्पताल में मंगलवार की देर रात प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हो गई।
इसके बाद अस्पताल के संचालक व कर्मी प्रसूता एवं उनके स्वजन को छोड़ फरार हो गए। साथ में नवजात के शव को भी लेते गए। अस्पताल संचालक एवं अन्य की गिरफ्तारी की मांग को लेकर स्वजन व ग्रामीणों की भीड़ अस्पताल के पास जमी हुई थी।
जानकारी के अनुसार, समस्तीपुर जिले के रोसड़ा थाना के बैद्यनाथपुर लक्ष्मीपुर के रौशन कुमार यादव की पत्नी अंजली कुमारी (25) सात माह की गर्भवती थी। प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार की शाम स्वजन उसे लेकर बहेड़ी के उक्त अस्पताल में पहुंचे।
कर्मियों ने बताया कि गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई है। इसलिए सिजेरियन करना होगा। रात में सिजेरियन के बाद नवजात को निकाला गया। इस क्रम में प्रसूता की मौत हो गई।
इसके बाद अस्पताल संचालक प्रसूता के शव को छोड़ मृत नवजात को लेकर फरार हो गए। साथ में अस्पताल का बोर्ड एवं मरीज का पुर्जा भी लेते गए मकान पर आदर्श मेडिकल हाल का बोर्ड लगा है, लेकिन दुकान के शटर में ताला बंद है।
सूचना मिलने पर अंचलाधिकारी रविकांत, चिकित्सा प्रभारी डा. बीडी महतो, थानाध्यक्ष सूरज कुमार गुप्ता समेत ने अन्य पहुंचकर मामले की छानबीन की। थानाध्यक्ष गुप्ता ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया। अंचलाधिकारी रविकांत के नेतृत्व में अस्पताल एवं दवा दुकान को सील कर दिया गया है।
ग्रामीण चिकित्सक पिता की सलाह पर कराया गया था भर्ती
बताते हैं कि गर्भवती होने के बाद अंजली का उपचार रोसड़ा में डा. विभा कुमारी एवं डा. अमृता कुमारी से चल रहा था। मंगलवार को स्वजन उसे रोसड़ा में चिकित्सक के पास ले गए।
वहां अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट के बाद चिकित्सक ने समस्तीपुर या दरभंगा ले जाने की सलाह दी। लेकिन अंजली के पिता बिरौल थाना क्षेत्र के हरसेर निवासी ग्रामीण चिकित्सक लालबाबू यादव की सलाह पर उसे समस्तीपुर या दरभंगा की जगह बहेड़ी के इस अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
इस अस्पताल का संचालन बहेड़ी की एक आशा और बिरौल के भोरवा कोरली के ग्रामीण चिकित्सक द्वारा किए जाने की बात कही जा रही है। सरकारी अस्पताल में आपूर्ति होने वाली ओआरएस की 10-12 पैकेट यहां मिली है। पीएचसी एवं थाना से करीब तीन सौ मीटर की दूरी पर संचालित इस अवैध अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद पूरी व्यवस्था कठघरे में है।
सात कमरे में लगे हैं 10 बेड
जानकारी के अनुसार, समस्तीपुर जिले के शिवाजीनगर थाना के चतरा निवासी के मकान में इस अस्पताल का संचालन हो रहा है। अंदर में सात कमरे में 10 बेड लगे हुए हैं। बाहर के दो कमरे में दवा की दुकान है।
अंजली की शादी वर्ष 2019 में हुई थी। उसे पहले से पांच साल की एक बेटी अनुष्का है। उसके पति गुजरात में मजदूरी करते हैं। घटना की सूचना के बाद वह घर के लिए चल दिए हैं।
अस्पताल बंदकर फरार हो जाते हैं संचालक
इधर, अवैध अस्पताल के संचालन के संबंध में पूछे जाने पर चिकित्सा प्रभारी डा. बीडी महतो ने कहा कि जब हम लोग कार्रवाई करते हैं तो संचालक अवैध अस्पताल को बंदकर भाग जाते हैं। बहेड़ी पीएचसी में हर रोज करीब चार सौ मरीज का उपचार होता है।
इस दौरान चिकित्सक की सलाह पर मरीजों को दवाएं दी जाती है। उसी में किसी मरीज को दी गई ओआरएस इस अस्पताल तक पहुंची है। पूछने पर बताया कि जरूरत के मुताबिक एक मरीज को चार से पांच पैकेट ओआरएस दिया जाता है। अस्पताल को सील कर दिया गया है। प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। यह अस्पताल गैर निबंधित है।
