बिहार के पोखरों का मखाना अब विदेशों में मचा रहा धूम, 20 से अधिक देशों तक पहुंचा मिथिला का स्वाद
मिथिला का मखाना अब स्थानीय बाजारों से निकलकर 20 से अधिक देशों में अपनी पहचान बना रहा है। दरभंगा से ...और पढ़ें

मखाना से तैयार विभिन्न प्रकार के फ्लेवर्ड मखाना। सौजन्य- करोबारी
HighLights
मखाना अब 20 से अधिक देशों में निर्यात हो रहा है।
दरभंगा से कनाडा को 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना भेजा गया।
मखाने से डोसा, कुकीज जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद बन रहे हैं।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। कभी मिथिला के पोखरों और स्थानीय बाजारों तक सीमित रहने वाला मखाना अब स्वाद, तकनीक और आधुनिक प्रसंस्करण के दम पर दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना रहा है।
सादा मखाना अब फ्लेवर्ड रूप में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, सिंगापुर और दुबई समेत 20 से अधिक देशों तक पहुंच रहा है। दरभंगा से हाल ही में कनाडा के लिए सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाने की समुद्री खेप भेजी गई। इससे मखाने के अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
सादा मखाने से फ्लेवर्ड तक का सफर
मखाने की बढ़ती मांग ने इसके कारोबार का स्वरूप बदल दिया है। पारंपरिक मखाने को अब अलग-अलग स्वाद, आकर्षक पैकेजिंग और बेहतर ब्रांडिंग के साथ बाजार में उतारा जा रहा है। इससे मखाना केवल पारंपरिक स्नैक नहीं रहा, बल्कि आधुनिक खाद्य उत्पाद के रूप में भी पहचान बना रहा है।
20 से अधिक देशों में पहुंचा स्वाद
फ्लेवर्ड मखाने की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, सिंगापुर और दुबई समेत 20 से अधिक देशों में मिथिला के मखाने की पहुंच बनी है। एपीडा के सहयोग से कनाडा भेजी गई सात मीट्रिक टन की खेप को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मखाने से डोसा और कुकीज तक
दरभंगा में वर्ष 2019 से मखाना आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों पर काम कर रहे एमबीए मखाना वाला ने मखाने को नए रूप में पेश करने की पहल की। मिथिला मखाना के जीआइ अधिकृत उपयोगकर्ता इस संस्था की ओर से मखाने से डोसा, खीर, कुकीज, शेक, कुल्फी, इडली और काफी जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
स्टार्टअप नीति से मिला विस्तार
दरभंगा से शुरू हुई इस पहल को बाद में बिहार स्टार्टअप नीति के तहत विस्तार मिला। इसके बाद जिले में कई स्थानीय इकाइयां और नए उद्यमी मखाने के उत्पाद तैयार कर रहे हैं। आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिये इन्हें देश के साथ विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है।
किसानों की उपज से उभरते उद्योग तक
मखाने के प्रसंस्करण और निर्यात ने इसके कारोबार को नई दिशा दी है। अब यह केवल किसानों की उपज नहीं रह गया है। इसके साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार और कारोबार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। मिथिला का मखाना अब पोखरों से निकलकर वैश्विक बाजार में अपनी नई कहानी लिख रहा है।
