दरभंगा। कुछ खेलों के प्रशिक्षण के लिए महीनों का कैंप तो कुछ के लिए महज खानापूरी। यूं कहें कि यह खेल और खिलाड़ियों के साथ भी दोहरी मानसिकता का परिचायक है। जी हां, कुछ ऐसी ही गतिविधि इन दिनों लनामिविवि में देखने को मिल रही है। अंतर महाविद्यालय खेल प्रतियोगिताओं का खेल कैलेंडर विवि पहले की जारी कर चुका है। दो खेल का आयोजन भी हो चुका है। इनमें शतरंज और टेबल-टेनिस शामिल है। अब बैड¨मटन की बारी है। इस बीच डॉ. नागेंद्र झा स्टेडियम के एक छोर पर कुछ खिलाड़ियों का प्रशिक्षण चल रहा है। पूछने पर पता चला कि हैंडबॉल महिला व पुरुष खिलाड़ियों का स्पेशल कैंप लगा हुआ है। जबकि अंतर महाविद्यालय हैंडबॉल प्रतियोगिता का आयोजन सितंबर महीने में होना है। इससे पूर्व ही स्पेशल कैंप के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। बताया गया कि स्पोर्टस बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पिछली बार जिन टीमों ने ऑल इंडिया के लिए क्वालीफाई किया है, उन टीमों को स्पेशल कैंप कराएं। गौर करने वाली बात है कि अंतर महाविद्यालय खेल प्रतियोगिताओं में टीमें भाग नहीं लेती, इससे विवि को कोई मतलब नहीं है। जबकि कुछ खेलों को विशेष तरजीह जा रही है। बताया गया कि कबड्डी की महिला व पुरुष तथा बैड¨मटन के पुरुष टीम का भी स्पेशल कैंप होना है। इन टीमों ने भी पिछली बार ऑल इंडिया के लिए क्वालीफाई किया था। बता दें कि हैंडबॉल का स्पेशल कैंप 14 अगस्त से विवि मुख्यालय में चल रहा है। इनमें पुरुष के 21 तथा महिला की 20 खिलाड़ी भाग ले रही है। को¨चग के लिए विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश से मुशर्रफ हुसैन और राकेश कुमार निराला को बुलाया गया है। 31 दिनों तक कैंप होगा। कोच को एक हजार की दर से भुगतान किया जाएगा। यानी की करीब 62 हजार रुपये का भुगतान विवि करेगा। इसके अतिरिक्त ठहराव की व्यवस्था भी विवि की ओर से दी गई है। जबकि खिलाड़ियों को 250 रुपये की दर से भुगतान किया जाना है। इधर, अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता के बाद जो खिलाड़ी चुनकर आएंगे, उनके लिए भी को¨चग की व्यवस्था की जाएगी। यानी एक खेल के लिए दो-दो बार को¨चग। दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विवि की टीम में 16 खिलाड़ी शामिल होते हैं तो ऐसे में 20 और 21 खिलाड़ी कहां से आ गए? कहते हैं खिलाड़ी विवि प्रशासन को पिछली टीमें मसलन जिनका प्रदर्शन अन्य टीमों की अपेक्षा बेहतर नहीं है, वैसी टीमों को स्पेशल को¨चग कराई जानी चाहिए। जो टीमें ऑल इंडिया क्वालीफाई करती है, वे बेहतर टीमें होती है। उन्हें भी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। लेकिन कमजोर टीम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

-मनीष राज, पूर्व खिलाड़ी सह सीनेट सदस्य, लनामिविवि। अंतर महाविद्यालय खेल आयोजनों में तो कॉलेज भाग नहीं लेते। पहले तो इसे दुरुस्त करना होगा। केवल उम्दा टीमों का स्पेशल लगाया जाना, अन्य खिलाड़ियों को निराशा दे रहा है। विवि को सभी खेलों के लिए एक सोच रहनी चाहिए।

-नीलेश मिश्रा, क्रिकेट खिलाड़ी।

खेल और खिलाड़ियों का विकास सामान्य रूप से होना चाहिए। ये नहीं कि एक खेल को प्राथमिकता दी जाए और दूसरी को नहीं। किसी को स्पेशल को¨चग तो किसी को नहीं, ऐसा नहीं होना चाहिए।

-कोमल कुमारी, विवि फुटबॉल कप्तान।

कॉलेजों में खेल गतिविधि को बढ़ावा देने की पहल करनी चाहिए। कॉलेजों में सालों भर खेलकूद नहीं होता, न तो जिला में ही कोई व्यवस्था है। पहले इनको दुरुस्त करना होगा।

-सोनी कुमारी, खो-खो खिलाड़ी।

कोट स्पोर्टस बोर्ड की बैठक में समर कैंप कराने का निर्णय लिया गया था। इसी के तहत खिलाड़ियों का प्रशिक्षण चल रहा है। जिन टीमों ने पिछले वर्ष ऑल इंडिया के लिए क्वालीफाई किया है, वैसी टीमों का प्रशिक्षण होना है।

-अशोक कुमार, सहायक, क्रीड़ा विभाग, लनामिविवि।

Posted By: Jagran