विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थियों का भविष्य अधर में, डेढ़ साल बाद भी मौखिकी नहीं

Published: Fri, 29 May 2026 07:38 PM (IST)

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थियों की मौखिक परीक्षा डेढ़ साल से अधिक समय से लंबित है, जिससे उनका ...और पढ़ें

यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

जागरण संवाददाता, दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे शोधार्थियों के करियर महत्व को कोई नहीं समझ रहा है। एक शोधार्थी उपाधि के बाद कहां जाना चाहता है, क्या उसके अरमान हैं, उसने क्या सपने देंखे हैं।

इससे किसी को कोई मतलब नहीं। लालफीताशाही जैसे चल रही है,वैसे ही चलेगी। चाहे किसी का करियर दाव पर क्यों नहीं लग जाए। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में कई ऐसे शोधार्थी हैं, जिन्होंने अपना शोध पत्र समय सीमा के भीतर विश्वविद्यालय में जमा कर दिया है।

इसके बावजूद, महीनों बीत जाने के बाद भी उनकी मौखिक परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकी है। इस लेटलतीफी के कारण शोधार्थियों का करियर अधर में लटक गया है।

नियमों के मुताबिक, शोध पत्र जमा होने के एक निश्चित समय के भीतर मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी कर मौखिक परीक्षा आयोजित हो जानी चाहिए। लेकिन बाह्य विशेषज्ञों की सुस्ती और प्रशासनिक शिथिलता के कारण यह प्रक्रिया कछुआ गति से चल रही है।

पीड़ित शोधार्थियों का कहना है कि वे लगातार परीक्षा विभाग और संबंधित विभागाध्यक्षों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल 'प्रक्रिया चल रही है' का आश्वासन देकर टाल दिया जाता है।

इसके पीछे बाह्य विशेषज्ञों की ओर से समय पर मौखिक की मंजूरी नहीं देना भी शोधार्थियों को डिग्री मिलने में अत्यधिक देरी की बात कही जा रही है।

कई छात्रों का चयन सहायक प्राध्यापक या अन्य उच्च पदों के लिए हो चुका है, लेकिन अंतिम डिग्री या प्रोविजनल सर्टिफिकेट न होने के कारण उनकी नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा, कई शोधार्थी आगे के पोस्ट-डाक्टरल रिसर्च या फेलोशिप के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।

नया मामला एक विभाग के पीएचडी छात्रा का सामने आया है। जनवरी 2025 में अपना शोध प्रबंध जमा करने के बाद विगत डेढ़ साल से लगातार विभाग व विश्वविद्यालय का चक्कर काट रही है।

अबतक कोई पदाधिकारी जवाबदेही लेने को तैयार ही नही दिख रहे हैं। लगभग डेढ़ साल पहले थीसिस जमा करने के बावजूद अबतक उक्त छात्रा का मौखिकी आयोजित नहीं किया गया।

जबकि रेगुलेशन-2016 के नियमानुसार थीसिस जमा करने के छह माह के भीतर मौखिकी आयोजित कर रिजल्ट जारी करने की जवाबदेही विश्वविद्यालय की होती है।

अतिथि शिक्षक बहाली से वंचित हो सकते दर्जनों शोधार्थी

विश्वविद्यालय में अतिथि शिक्षक बहाली के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 23 मई निर्धारित है। इसके बावजूद अबतक मौखिकी और अवार्ड नोटिफिकेशन नहीं होने के कारण कई शोधार्थी आवेदन से वंचित हो रहे हैं।

छात्र नेता दिलीप कुमार, अवधेश पासवान ने बताया कि विश्वविद्यालय को जवाबदेही लेकर शीघ्र मौखिकी आयोजित करवानी चाहिए। ताकि समय रहते शोधार्थी अतिथि बहाली में आवेदन कर सके।

प्रशासनिक उदासीनता और समन्वय की कमी

छात्र नेता विवेक कुमार, सतीश झा, चंदन कुमार सिंह बताते हैं कि बाहरी परीक्षकों से समय न मिलना और विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग के बीच समन्वय की कमी इस देरी का मुख्य कारण है।

शोध पत्र जांच के लिए भेजे जाने के बाद महीनों तक उसकी ट्रैकिंग नहीं होती। छात्र संगठनों ने भी इस मुद्दे पर कड़ा विरोध जताया है और चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सभी लंबित मौखिक परीक्षाएं आयोजित नहीं की गईं, तो वे विश्वविद्यालय मुख्यालय पर तालाबंदी और उग्र आंदोलन करेंगे।

शोधार्थियों ने कुलपति से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि एक निश्चित समय-सीमा तय कर रुकी हुई परीक्षाओं को जल्द से जल्द संपन्न कराया जा सके और उनके भविष्य को बर्बाद होने से बचाया जा सके।

हाल ही में मौखिकी आयोजित करने में पीएचडी शाखा ने रिकार्ड दर्ज किया है। बाह्य विशेषज्ञों के कभी-कभी इसमें लेटलतीफी जरूर होती है। लेकिन विभाग ससमय मौखिकी कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
डा. सुरेश पासवान, उप-परीक्षा नियंत्रक (शोध) , लनामिवि, दरभंगा।