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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन पर रोक, राजभवन ने अनियमितता पर लिया एक्शन

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:04 PM (GMT+05:30)

राजभवन ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा (पैट-2024) की नामांकन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है। ...और पढ़ें

कुलपति को भेजे पत्र में नामांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया है। फाइल फोटो

कुलपति को भेजे पत्र में नामांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया है। फाइल फोटो

HighLights

  1. राजभवन ने LNMU पीएचडी नामांकन प्रक्रिया पर लगाई रोक।

  2. सीटों की संख्या में मनमानी वृद्धि बनी मुख्य वजह।

  3. सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चित, कुलाधिपति की मंजूरी का इंतजार।

जागरण संवाददाता, दरभंगा। Lnmu Phd Admission 2024: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा (पैट-2024) के तहत चल रही नामांकन प्रक्रिया पर राजभवन ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

राजभवन के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 12 सितंबर से साक्षात्कार और नामांकन से जुड़ी सभी गतिविधियों को स्थगित करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कुलपति को भेजे पत्र में नामांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया है।

अधिसूचित सीटों में वृद्धि

पत्र के अनुसार पीएचडी नामांकन प्रक्रिया के दौरान विज्ञापित सीटों की संख्या में अचानक और अत्यधिक बढ़ोतरी कर दी गई है।

सीटों में की गई यह वृद्धि पूरी तरह से मनमानी और नियम विरुद्ध प्रतीत होती है, क्योंकि यह पात्र शोध पर्यवेक्षकों की निर्धारित क्षमता मानकों के अनुरूप नहीं है।

विश्वविद्यालय ने 22 अगस्त को कुल 1002 सीटों की अधिसूचना जारी की थी, जिसे एक सितंबर को संशोधित कर 1503 कर दिया गया।

साक्षात्कार प्रक्रिया पर ब्रेक

विश्वविद्यालय ने बढ़ी हुई सीटों के अनुसार 11 सितंबर से साक्षात्कार आयोजित किया था, जिसमें मैथिली, जूलॉजी और भूगोल सहित कई विषयों के अभ्यर्थी शामिल हुए थे।

हालांकि, राजभवन के आदेश के बाद कुलसचिव ने ज्ञापांक पीएचडी/9960/26 के तहत सभी संकायाध्यक्षों और विभागाध्यक्षों को प्रक्रिया रोकने का आदेश जारी कर दिया।

आदेश जारी होते ही स्नातकोत्तर विभागों के शिक्षकों और पैट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया।

भविष्य के अभ्यर्थियों पर असर

अपर मुख्य सचिव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नियमों को दरकिनार कर बेतहाशा सीटें भरने से आने वाले वर्षों में नए अभ्यर्थियों के लिए पीएचडी की सीटें ही नहीं बचेंगी।

राजभवन ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और मानकों की गंभीर कमी पर सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले भी साक्षात्कार पर रोक लगाई गई थी, जिसे बाद में हटाया गया था।

कुलाधिपति की मंजूरी जरूरी

विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट कुलाधिपति के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। लोकभवन स्तर से समीक्षा और अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही पैट-2024 की नामांकन प्रक्रिया पुनः प्रारंभ हो सकेगी।

इस अचानक लगी रोक के कारण साक्षात्कार की तैयारी में जुटे सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितता में लटक गया है।