Bihar News : संस्कृत विश्वविद्यालय में बड़ा बदलाव, अब एक और दो वर्षीय PG का मिलेगा विकल्प
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत एक और दो वर्षीय आचार्य (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रम अंतिम चरण ...और पढ़ें

आचार्य पाठ्यक्रम समिति की बैठक में विषय-विशेषज्ञ द्वारा प्रस्तुत पाठ्यक्रम का अवलोकन करते सदस्य। (सौ. पीआरओ)
HighLights
NEP 2020 अनुरूप एक-दो वर्षीय आचार्य पाठ्यक्रम तैयार।
स्नातकोत्तर शुल्क को एक-तिहाई करने की मजबूत अनुशंसा।
अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, शोध विकल्प भी उपलब्ध।
जागरण संवाददाता, दरभंगा । लोकभवन पटना के निर्देशों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में दो वर्षीय आचार्य (स्नातकोत्तर) के प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर का पाठ्यक्रम निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है।
कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय की अध्यक्षता में तैयार इस नवनिर्मित पाठ्यक्रम को आगामी 14 जुलाई को प्रस्तावित विद्वत परिषद की बैठक में स्वीकृति के लिए रखा जाएगा।
शुक्रवार को आयोजित आचार्य पाठ्यक्रम समिति की बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय के पीआरओ डा. निशिकांत ने बताया कि विद्वत परिषद् की हरी झंडी मिलते ही इसे बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद और अंत में कुलाधिपति की स्वीकृति के लिए लोकभवन, पटना भेजा जाएगा।
वहां से अंतिम अनुमोदन प्राप्त होते ही इसे विश्वविद्यालय में लागू कर दिया जाएगा। विशेष कार्य पदाधिकारी (शैक्षणिक) डा. रामसेवक झा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत चार वर्षीय स्नातक करने वालों के लिए एक वर्षीय और तीन वर्षीय स्नातक करने वालों के लिए दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम उपलब्ध होगा।
छात्र प्रथम वर्ष के बाद स्नातकोत्तर डिप्लोमा लेकर कोर्स से बाहर भी निकल सकेंगे। इसके अलावा छात्रों को केवल पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम सहित शोध तथा केवल शोध जैसे बहु-विकल्प मिलेंगे। नई व्यवस्था में अकादमिक बैंक आफ क्रेडिट और 'मूक' के माध्यम से 40 प्रतिशत तक क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा होगी।
संस्कृत शिक्षा को मुफ्त रखने के लिए शुल्क कम करने की अनुशंसा
लोकभवन की नूतन अधिसूचना के अनुसार पीजी में प्रवेश के लिए प्रति सेमेस्टर 4,800 निर्धारित हैं। हालांकि, पाठ्यक्रम निर्माण समिति ने छात्रों की आर्थिक स्थिति और प्राचीन शास्त्रों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस निर्धारित शुल्क को कम करके एक-तिहाई करने की मजबूत अनुशंसा की है।
प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर में छह-छह पत्र 22-22 क्रेडिट के होंगे, जिनमें दोनों सेमेस्टर में 4-4 पत्र कोर कोर्स के होंगे। पांचवें पत्र के रूप में योगविज्ञानम्, कृषिविज्ञानम्, वास्तुविज्ञानम् एवं आयुर्विज्ञानम् को रखा गया है। छात्र प्रथम व द्वितीय सेमेस्टर में अपनी स्वेच्छा से इनमें से विषयों का चयन करेंगे।
प्रथम सेमेस्टर के छठे पत्र में 'भारतीय ज्ञान परंपरा' को रखा गया है। वहीं द्वितीय सेमेस्टर के छठे पत्र में छात्र (नैतिक शिक्षा- ईशावास्योपनिषद् व विदुरनीति), संस्कृत भाषा दक्षता या कंप्यूटर शिक्षा में से किसी एक को चुन सकेंगे।
प्रवेश के नियम और पात्रता
स्नातक (शास्त्री) में पढ़े गए मुख्य विषय, गौण विषय या एलाइड विषयों के छात्र आचार्य में प्रवेश के पात्र होंगे। इसके अतिरिक्त यदि कोई छात्र किसी अन्य मुख्य विषय का चयन करता है, तो उसे पहले प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी अनिवार्य होगी।
इस पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने में छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रो. पुरेन्द्र वारिक, प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. दयानाथ झा, डा. शिवलोचन झा, डा. शम्भुशरण तिवारी भी सक्रिय हैं।
