दरभंगा। बाढ़ की राजधानी कुशेश्वरस्थान के कमला बलान एवं कोशी के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। गुरुवार को नए इलाकों में भी बाढ़ का पानी फैल जाने से जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है। बाढ़ से लगभग साठ हजार की आबादी प्रभावित हुई है। लोगो के साथ-साथ मवेशियों की भी जान पर बन आई है। जलस्तर में वृद्धि से धीरे धीरे प्रखंड के अधिकतर गांव टापू बनते जा रहे हैं। यहां रह रहे हर परिवार की चलने फिरने की आजादी छीन गई है। कारण कि बाढ़ के बाढ़ के पानी में आप बगैर नाव एक से से दूसरी जगह नहीं जा सकते हैं। हर कोई लकड़ी की बनी नाव को खरीदने की जुगत में है तो कई अपनी पुरानी नाव को ठीक करने में लगे हुए हैं। ऐसे में नाव बनाने वाले कारीगर की चांदी है। ग्यारह हाथ लंबाई वाली जामुन की नाव पंद्रह से बीस हजार रुपये में बिक रही है। सबसे विकट स्थिति इटहर पंचायत के चोकिया, लक्षि्मनियां तथा बिसुनिया पोखर गांव के लोगो की है। जिमराहा गांव के संजीत राय, चोकिया गांव पिताम्बर पासवान, भूपनारायण राय सहित कई लोगों ने बताया कि अब रात को सो नही पा रहा हूं। यह सोच कर कि कब कितना पानी आ जाए इसका कोई ठिकाना नहीं है। रोज रातजगा करने को मजबूर हूं। कमला बलान पूर्वी तथा पश्चिमी तटबंध के बीच बसे इटहर, उसड़ी, उजुआ सिमरटोका तथा तिलकेश्वर पंचायत के लोग भी बाढ़ के पानी से प्रभावित होने लगे हैं।

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