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बिहार पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज, पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी तो बदलेंगे सियासी समीकरण

Published: Sun, 16 Aug 2026 04:45 PM (IST)

बिहार में पंचायत चुनाव से पहले 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों के संभावित परिसीमन से सियासी हलचल तेज ...और पढ़ें

इसमें एआई जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें एआई जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. 2011 जनगणना के आधार पर पंचायतों का परिसीमन होगा।

  2. परिसीमन से पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी, सियासी समीकरण प्रभावित होंगे।

  3. केवटी में चुनावी सीटें बढ़ने की संभावना है।

संवाद सहयोगी, केवटी (दरभंगा)। बिहार में पंचायत चुनाव की आहट के साथ गांवों में सियासी हलचल तेज होने लगी है। इस बार चुनावी चर्चा सिर्फ आरक्षण पर नहीं, पंचायतों के संभावित परिसीमन पर भी टिकी है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों की सीमाओं में बदलाव की तैयारी से संभावित उम्मीदवारों की धड़कन बढ़ गई है।

कौन-सा गांव किस पंचायत में जाएगा और कहां नई पंचायत आकार लेगी, इसे लेकर कयासों का दौर शुरू है। परिसीमन हुआ तो कई पुराने समीकरण बदल सकते हैं और नए दावेदारों के लिए चुनावी मैदान खुल सकता है। ऐसे में पंचायतों की सीमा ही तय करेगी कि किसकी सियासी जमीन मजबूत होगी और किसका किला हिलेगा।

पंचायत चुनाव की दस्तक से पहले दरभंगा जिले के केवटी में इस बार आरक्षण से ज्यादा पंचायत परिसीमन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। किस गांव का पता बदलेगा, कौन-सा इलाका नई पंचायत का हिस्सा बनेगा और कहां नई पंचायत का गठन होगा—इन सवालों ने संभावित उम्मीदवारों की धड़कन बढ़ा दी है। प्रखंड मुख्यालय से लेकर गांव की चौपाल तक अब परिसीमन ही चुनावी चर्चा का केंद्र बन गया है।

आरक्षण से पहले सीमाओं पर नजर

राज्य सरकार ने वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया को मंजूरी दी है। इसके बाद संभावित उम्मीदवार नई पंचायतों की सीमाओं और गठन की संभावनाओं पर नजर रख रहे हैं। अब तक पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण की संभावित सूची पर ही सबसे अधिक चर्चा होती थी। इस बार गांवों के पंचायतवार पुनर्गठन को लेकर लोगों की उत्सुकता अधिक है।

मुख्यालय पहुंच रहे दावेदार

परिसीमन की संभावित तस्वीर जानने के लिए कई भावी उम्मीदवार प्रखंड मुख्यालय का रुख कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि पंचायतों की सीमाएं बदलने के साथ चुनावी समीकरण भी बदलेंगे। नई पंचायत बनने की स्थिति में कई नए दावेदारों के लिए चुनाव मैदान में उतरने का अवसर पैदा हो सकता है।

बढ़ सकती हैं चुनावी सीटें

जानकारों के अनुसार परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या बढ़ी तो मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, पंच और जिला परिषद सदस्य के पदों की संख्या में भी वृद्धि हो सकती है। इससे चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के लिए संभावनाएं बढ़ेंगी।

26 पंचायतों में इतने पद

वर्तमान में केवटी प्रखंड में 26 पंचायतें हैं। यहां मुखिया और सरपंच के 26-26 पद हैं। पंचायत समिति सदस्य के 36 और जिला परिषद सदस्य के चार पद हैं। वहीं वार्ड सदस्य और पंच के 355-355 पद सृजित हैं। परिसीमन के बाद इन पदों की संख्या में बदलाव की उम्मीद है।

कोठिया पर खास नजर

प्रखंड का सबसे बड़ा पंचायत कोठिया है, जहां वर्तमान में 19 वार्ड हैं। केवटी, लालगंज, मझिगामा, पैगंबरपुर और बरही पंचायत में 16-16 वार्ड हैं। जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कोठिया पंचायत के पुनर्गठन और नई पंचायत के गठन की संभावना जताई जा रही है।

बदलेंगे सियासी समीकरण

मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष सह रजौरा पंचायत के मुखिया इफ्तेखार अहमद उर्फ छोटन और लालगंज पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि राम नारायण यादव उर्फ चंदन यादव ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कई पंचायतों की आबादी में बदलाव आया है।

इसी आधार पर सीमाओं का पुनर्निर्धारण होगा। परिसीमन के साथ ही केवटी में चुनावी समीकरण बदलने की उम्मीद है और राजनीतिक सरगर्मी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।