दरभंगा । संस्कृत का विकास हो। लड़किया भी इसकी शिक्षा लें, इसके लिए पिछले आठ साल से काम कर रही हैं डॉ. रानी कुमारी। उच्च विद्यालय में शिक्षक होने के साथ वे अपने घर पर सुबह-शाम दो-दो घंटे लड़कियों को निश्शुल्क संस्कृत पढ़ाती हैं। अभी 25 लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। अब तक सैकड़ों को संस्कृत से जोड़ चुकी हैं। प्राच्य विद्या को बचाने के लिए उनका यह अभियान लोगों को प्रेरणा देता है।

मूलरूप से समस्तीपुर के करियन गांव की डॉ. रानी के पिता गोपीकांत पाठक संस्कृत शिक्षक रहे हैं। पिता की प्रेरणा से उन्होंने इंटर के बाद संस्कृत शिक्षा को अपना लिया। संस्कृत में बीए और एमए किया। उन्होंने वर्ष 2010 से शिक्षण की शुरुआत विद्या मंदिर से की। इसके साथ ही लड़कियों को संस्कृत की शिक्षा के प्रति जागरूक करने लगीं। इस दौरान 2013 में मेहनत के बल पर सरकारी शिक्षक की नौकरी मिली। तैनाती प्लस टू बालिका उच्च विद्यालय, फारबिसगंज, अररिया में हुई। यहां स्कूल से खाली समय मिलने पर सुबह-शाम घर पर लड़कियों को निश्शुल्क संस्कृत की शिक्षा देने लगीं। इस दौरान उन्होंने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा से संस्कृत साहित्य-व्याकरण में पीएचडी भी की। इसमें पेशे से शिक्षक पति गोपाल कृष्ण चौधरी का पूरा सहयोग मिला। फिर तो वे लगातार अपने मिशन में बढ़ती गई। कई लड़कियों को प्राच्य विद्या की बदौलत आत्मनिर्भर बनाया। उनके प्रयास से कई मुस्लिम लड़कियां भी संस्कृत पढ़ रही हैं। इनमें काजल खातून, सलमा परवीन और राफिया आदि हैं।

डॉ. रानी लेखन से भी जुड़ी हैं। हाल ही में उनकी 'भासकालीन भारतम' नामक पुस्तक प्रकाशित हुई। इसमें भास के नाटकों में भारतीय सामाजिक जीवन पर धर्मशास्त्र का प्रभाव, आर्थिक जीवन सहित अन्य पहलुओं का विवरण है। रानी कहती हैं कि प्राचीन साहित्य में अकूत ज्ञान का भंडार है। लेकिन, इस विद्या के प्रति लोगों की उदासीनता के कारण यह ज्ञान प्रसारित नहीं हो पा रहा। इसके प्रचार-प्रसार के लिए लोगो को आगे आने की जरूरत है।

संस्कृति को समझने का मिलता मौका : छात्रा निशा कुमारी, जूही कुमारी, रश्मि राज और काजल खातून सहित अन्य का कहना है कि वे संस्कृत पढ़कर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। संस्कृत से पहले डर लगता था, लेकिन अब लगता है कि सरल भाषा है। इसे पढ़ने से हमें अपनी संस्कृति को समझने का मौका भी मिलता है। संस्कृत के श्लोकों में काफी ज्ञान भरा है।

Posted By: Jagran