हड्डी के संक्रमण में कौन सी दवा करेगी असर, दरभंगा के DMCH की कल्चर जांच से मिली महत्वपूर्ण जानकारी
डीएमसीएच दरभंगा के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने हड्डी के संक्रमण से जूझ रहे मरीज के लिए सही एंटीबायोटिक की पहचान की ...और पढ़ें

डीएमसीएच का माइक्रोबायोलाजी विभाग।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। हड्डी के संक्रमण से जूझ रहे मरीज के इलाज में सही एंटीबायोटिक के चयन की दिशा में डीएमसीएच के माइक्रोबायोलाजी विभाग की जांच अहम साबित हुई है।
सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के न्यूरो सर्जरी वार्ड से भेजे गए साफ्ट टिश्यू और बोन चिप के कल्चर में स्टैफाइलोकोकस आरियस बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। एंटीबायोटिक संवेदनशीलता जांच में अधिकांश दवाओं के प्रति बैक्टीरिया में प्रतिरोध मिला, जबकि लिनेजोलिड के प्रति संवेदनशीलता पाई गई।
24 घंटे में दिखी बैक्टीरियल ग्रोथ
माइक्रोबायोलाजी विभाग में डा. अहसन हमीदी की टीम ने सैंपल की जांच की। इसमें मेडिकल लैब टेक्नीशियन अकील अहमद और पीजी छात्र भी शामिल रहे। कल्चर मीडिया प्लेट पर करीब 24 घंटे बाद बैक्टीरियल ग्रोथ दिखाई दी। इसके बाद कैटलेज, कोएगुलेज और ग्राम स्टेन समेत विभिन्न परीक्षणों के माध्यम से बैक्टीरिया की पहचान की गई।
जांच में स्टैफाइलोकोकस आरियस की पुष्टि
परीक्षण के बाद सैंपल में स्टैफाइलोकोकस आरियस की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक सेंसिटिविटी टेस्ट किया गया। करीब 48 घंटे बाद प्राप्त रिपोर्ट में अधिकांश एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध पाया गया। वहीं लिनेजोलिड के प्रति बैक्टीरिया संवेदनशील मिला।
इलाज में मिलेगी मदद
माइक्रोबायोलाजी विभाग की रिपोर्ट से चिकित्सकों को मरीज के संक्रमण के अनुरूप एंटीबायोटिक का चयन करने में मदद मिलेगी। इससे उपचार को संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया के अनुसार लक्षित करने में सहूलियत होगी। हालांकि, दवा का चयन मरीज की चिकित्सकीय स्थिति और संबंधित विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जाएगा।
हड्डी के संक्रमण में जांच अहम
विशेषज्ञों के अनुसार साफ्ट टिश्यू और बोन चिप कल्चर का उपयोग हड्डी तथा उसके आसपास के कोमल ऊतकों में संक्रमण की पहचान के लिए किया जाता है। आस्टियोमायलाइटिस यानी हड्डी के संक्रमण या गहरे घाव की स्थिति में यह जांच महत्वपूर्ण होती है। सर्जरी या बायोप्सी के दौरान संक्रमण वाली जगह से साफ्ट टिश्यू और हड्डी का छोटा टुकड़ा लेकर प्रयोगशाला में भेजा जाता है।
बैक्टीरिया के साथ दवा की भी पहचान
कल्चर जांच से संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया की पहचान होती है। इसके बाद एंटीबायोटिक संवेदनशीलता जांच से यह पता लगाया जाता है कि संबंधित बैक्टीरिया पर कौन सी दवा प्रभावी हो सकती है।
डीएमसीएच में हुई इस जांच से मरीज के उपचार के लिए लक्षित एंटीबायोटिक के चयन में मदद मिलेगी। जांच कार्य में डा. सुनील कुमार चौधरी, डा. सोनम सृष्टि और डा. अनूप कुमार का भी सहयोग रहा।
