दरभंगा । लोकसभा चुनाव को लेकर न सिर्फ युवा वोटर उत्साहित हैं बल्कि बुजुर्ग वोटरों में भी उत्साह है। केवटी प्रखंड के रनवे गांव के बुजुर्ग मतदाता सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक रामपरीक्षण दास अपने जीवन में दिए पहले वोट से लेकर अन्य चुनावों की स्मृतियों को साझा किया। कहा कि पहले लोकसभा चुनाव में पहला वोट पड़ने के दौरान वे युवा वोटर थे। वर्ष 1952 में देश में हो रहे पहले चुनाव में अंग्रेजों की गुलामी से निकलने का उत्साह था। तब और आज के चुनाव में बहुत अंतर आ गया है। राजनीति में सादगी से लेकर अपराधीकरण और वोटरों का लुभाने के लिए धन और बल का प्रयोग को देख चुके हैं। कहा कि जब प्रत्याशी पैदल और उनके समर्थक साइकिल से वोट मांगने आते थे। उस समय के चुनाव और आज प्रत्याशियों से लेकर उनके कार्यकर्ताओं द्वारा महंगे वाहनों से वोट मांगने के चुनाव को देख रहे हैं। पहले का चुनाव सादगी से होता था, आज पैसे के बल पर होता है। प्रत्याशी पानी की तरह पैसे को बहाते हैं। जब राज्य में शराबबंदी नहीं थी तो दल के नेताओं द्वारा वोटरों को शराब पिलाकर और नोट देकर वोट लेते भी देखा है। पैसा पर बिकने वाले वोटर गांधी छाप नोट की मांग करते थे। आज भी वोटर नोट पर वोट देते हैं पर लुक छिपके, सार्वजनिक तौर पर नहीं।

दैनिक जागरण रामपरीक्षण दास की लंबी आयु की कामना करता है।

Posted By: Jagran

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