दरभंगा । 1967 में कांग्रेस का जमाना था। लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार हो रहा था। जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में अनिरुद्ध साह मैदान में थे। तब चुनाव चिह्न दीपक छाप था। कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दिग्गज सत्यनारायण सिन्हा मैदान में थे। अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय चुनाव प्रचार के लिए दरभंगा आए थे। दोनों अपने उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार प्रसार के लिए जिले में रिक्शा से निकले थे। अटलजी और दीनदयाल जी रिक्शा से प्रचार प्रसार करते हसन चौक पर पहुंचे। उनके स्वागत को लेकर चौक पर काफी भीड़ थी। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब थे। यह कहते हैं जेपी सेनानी अधिवक्ता अरुण कुमार झा का। वे कहते हैं कि उस समय उनकी उम्र ग्यारह साल थी। हसन चौक पर स्वागत की जवाबदेही उनको ही सौंपी गई थी। दोनों नेताओं का फूल-माला से स्वागत किया गया। आरती उतारी गई। वहां से उनके रिक्शा के साथ शहर में प्रचार के लिए निकल गए। इस दौरान अटल जी से इतना प्रभावित हुए कि चुनाव के बाद उनके पास लखनऊ चले गए। उनके साथ लखनऊ में तीन माह तक प्रवास किया। अटलजी के कई भाषणों को सुनकर अपने व्यक्तित्व को निखारने की कोशिश की। उनकी प्रेरणा से छात्र राजनीति और सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी बढ़ गई। उस समय चुनाव प्रचार काफी शालीनता और अनुशासन में होता था। उम्मीदवार कोई भी हो भाषा की मर्यादा नहीं भूलते थे।

Posted By: Jagran

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