दरभंगा । दरभंगा शहर को बागमती नदी दो भागों में बांटती है। इनमें ज्यादातर स्थानों पर नदी के उसपर बहादुरपुर सहित सदर प्रखंड का कुछ इलाका आता है। नगर निगम के कुछ वार्ड भी इसके अंतर्गत आते हैं। नदी के मुहाने पर बसे शहरी और ग्रामीण इलाकों को नदी पर बना पुल जोड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लाइफ लाइन माना जाता है। हालांकि कुछ स्थानों पर यह पुलनुमा लाइफ लाइन आज आइसीयू में जीवन और मौत से जूझ रहा है। पता नहीं कब यह डोर टूट जाए और शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण इलाकों का एक बड़ा भू-भाग शहर से कट जाए। दरभंगा से रपट।

शहरी क्षेत्र का शुभंकरपुर पुल इलाके में महाराजी पुल के नाम से प्रसिद्ध है। नदी के उसपर लाखों की आबादी का रोजाना इस पुल से आना-जाना होता है। अंग्रेजों के समय में बनाया गया यह पुल आज पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। चुनाव के वक्त यह पुल राजनीतिक दलों का मुद्दा बन जाता है। स्थानीय से लेकर राजनेता तक नए पुल का सपना दिखाकर लोगों को ठग कर चले जाते हैं। लेकिन पचास वर्ष से भी अधिक समय बीत गया, इसका कायाकल्प नहीं हो सका। दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि समय के साथ-साथ पुल पर आवागमन, जान हथेली पर लेकर चलने जैसा है। लोग भगवान का नाम लेकर इस पार से उस पार होते हैं। इतना ही नहीं, नदी के उसपर बसी आबादी को घर बनाने से पहले भी कई बार सोचना पड़ता है। अमूमन भवन निर्माण सामग्री गिराने पर इनकी लागत करीब दोगुनी तक चली जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण इस पुल से होकर बड़े वाहनों का गुजरना वर्जित है। लिहाजा ट्रैक्टर व अन्य छोटे वाहनों से सामान को उस पार ले जाया जाता है। पुल पर बनी सड़क भी लगभग टूट चुकी है। यदि नीचे से कोई भी इस पुल को देख ले तो शायद इसपर से होकर गुजरना चाहेगा। पुल का निर्माण ब्रिटीशकाल में कराया गया था। इधर, नगर विधायक ने कुछ वर्ष पूर्व विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था। नदी के उस पार शहरी क्षेत्र का वार्ड 8, 9 व 23 स्थित है। इसके अंतर्गत शुभंकरपुर, रत्नोपट्टी, बाजितपुर, किलाघाट, चतरिया, सिमरा-नेहालपुर, गनौली, बस्ती, तेलिया पोखर आदि इलाके आते हैं।

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कितनी आबादी है प्रभावित

शहरी क्षेत्र के तीन वार्डों की बात करें तो नदी के उसपर बसी लगभग 40 हजार की आबादी इससे प्रभावित है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र की 70 से 80 हजार की आबादी बुरी तरह प्रभावित है। सबसे अधिक परेशानी बारिश के दिनों में होती है, जब नदी लबलबा जाती है। नदी में पानी अधिक होने के कारण उस वक्त इस पुल से होकर गुजरने से लोग सहम जाते हैं। ऐसे वक्त में लोग लंबी दूरी तय कर किलाघाट के पास बने आरसीसी पुल का उपयोग करना ज्यादा बेहतर समझते हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के लोग चतरिया में बने पुल या मब्बी होकर आवागमन करने को बाध्य होते हैं।

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पुल से होकर जाने पर अटकी रहती है जान

शुभंकरपुर निवासी रामशरण मंडल, रामप्रीत ठाकुर, गौतम झा, सुरेश मिश्र, पवन सिंह आदि ने बताया कि पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस पुल के उद्धार को लेकर कोई भी नेता गंभीर नहीं है। नदी के उस पार लाखों की आबादी प्रभावित है। सबसे बड़ी समस्या मकान बनाने को लेकर है। ट्रक पुल से होकर नहीं जाता। इसके कारण दोगुना रेट पर भवन निर्माण सामग्री खरीदने की बाध्यता है। पुल हिलता है, इसके कारण पुल पार करते वक्त लोगों के मन में एक डर लगा रहता है। गृहिणी कोमल कुमारी, रेणु ठाकुर, पिकी झा आदि ने बताया कि जब बच्चे पुल पार करके स्कूल या बाजार जाते हैं तो मन में डर लगा रहता है कि कहीं कुछ हो न जाए। कई स्थानों पर नए पुल का निर्माण कराया गया, लेकिन महत्वपूर्ण महाराजी पुल के निर्माण को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही है।

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कभी महाराज किया करते थे इस पुल का उपयोग

कभी दरभंगा महाराज घराने के लोग अपने परिजनों से मिलने के लिए इस पुल का उपयोग किया करते थे। साथ ही नदी के उसपर बने मंदिरों में पूजा-अर्चना को जाते थे। यहां जिले का एकलौता चर्चित बद्रीनाथ मंदिर इसी इलाके में है। यहां साल में एक बार मंदिर का पट खुलता है और बड़ी संख्या में लोग यहां पूजा-अर्चना को पहुंचते हैं।

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कहते हैं लोग : हजारों की आबादी का रोजाना होता है आना जाना पुल की स्थिति काफी नाजुक है। इससे होकर गुजरने में लोगों के मन में हमेशा डर बना रहता है। सूबे में काफी संख्या में पुल-पुलिया का निर्माण कराया गया, लेकिन इसका कायाकल्प नहीं हो सका। पुल के उसपार की हजारों की आबादी का रोजाना इससे होकर गुजरना होता है। एक तरह से यह इलाके का लाइफ-लाइन है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि किसी ने आज तक इसकी ओर मुड़ कर नहीं देखा। विधायक ने इसको लेकर विधानसभा में प्रश्न भी उठाया, लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है।

ईश्वर मंडल, शुभंकरपुर।

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सरकार और जनप्रतिनिधियों को इस पुल की अहमियत समझनी होगी। शहरी क्षेत्र के तीन वार्ड नदी के उसपर बसते हैं। लिहाजा नगर निगम को भी इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। चुनाव के वक्त लोगों की आस नेताओं से तो बढ़ जाती है, लेकिन वह कभी पूरी नहीं होती। कोई इसे मुद्दा नहीं बनाता। जनता को भी इस दिशा में सोचने की जरूरत है। यदि कोई हमारी पीड़ा नहीं समझता तो हमें भी वैसा जनप्रतिनिधि नहीं चुनना चाहिए।

अमर राय, शुभंकरपुर।

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यदि पुल का निर्माण हुआ है तो इसकी समय-समय पर मरम्मत भी जरूरी है। लेकिन महाराजी पुल के साथ ऐसा नहीं हुआ। आज स्थिति कुछ ऐसी है कि पुल से होकर गुजरने में भी डर लगा रहता है। पता नहीं कब गिर जाए। आप जब इससे होकर गुजरेंगे तो सहसा ही आपको ऐसा लगेगा कि आप किसी हिलते हुए रास्ते से होकर गुजर रहे हैं। पुल के निर्माण को लेकर आम लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा। जरूरत पड़ने पर लोगों को अब सड़कों पर उतरने की आवश्यकता है।

कामोद राय, शुभंकरपुर।

Posted By: Jagran

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