दरभंगा । कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। यदि किसी परिवार में कोई व्यक्ति कैंसर से पीड़ित हो जाता है तो केवल वह रोगी ही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार आर्थिक व मानसिक पीड़ा झेलने को विवश हो जाता है। कैंसर की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस रोग की पहचान होने के साथ रोगी और परिजन जीवन की उम्मीद छोड़ देते हैं। बेनीपुर क्षेत्र में इस बीमारी ने ना केवल कई लोगों को असमय काल कवलित किया है, बल्कि कई परिवारों को आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। खासकर, महिनाम व पोहदी की पहचान कैंसर पीड़ित गांव के रूप में होने लगी है। कैंसर की भयावहता अब एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। यहां कैंसर का पहला मामला 2007 में सामने आया। पिछले 12 सालों में इस रोग ने महिनाम व पोहद्दी गांव के करीब दो दर्जन लोगों की जान ले ली है। अभी इन दोनों गांवों में एक दर्जन से अधिक कैंसर पीड़ित हैं और जीवन-मौत से संघर्ष कर रहे हैं। पिछले चार सालों में इन दोनों गांवों में कैंसर की भयावहता बढ़ी है। सुध लेने वाला कोई नहीं है। जनप्रतिनिधियों व प्रशासन की उदासीनता से लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बेनीपुर से शैलेंद्र कुमार झा की रिपोर्ट :

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12 साल पहले सामने आया पहला मामला :

कैंसर का पहला मामला वर्ष 2012 में उस समय सामने आया जब महिनाम की अरहुलिया देवी का निधन हुआ। उनके इलाज के दौरान पता चला कि उन्हें कैंसर है। उसके बाद लोग जांच कराने लगे और कैंसर के मामले लगातार सामने आने लगे। ग्रामीण बताते हैं कि उससे पहले भी कई लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन उस समय कैंसर की बात सामने नहीं आई थी। पिछले चार-पांच सालों में कैंसर का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। अब तक दोनों गांव के दो दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

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कैंसर ने छीन ली इनकी जिदगी :

महिनाम की अरहुलिया देवी, बैद्यनाथ मिश्र, रामकुमार मिश्र, जगदीश मिश्र, वेदानंद मिश्र, शीला देवी, रामसखी देवी, कलिया देवी, चलित्तर साहु, जटाशंकर झा, पूर्व विधायक महेंद्र झा आजाद की पत्नी काबरी झा, पूर्व मुखिया कुमलेन्दु झा उर्फ बाउ की पत्नी की मौत कैंसर से हो चुकी है। पोहदी गांव में कैंसर ने शिव पाठक, हरिशचन्द्र ठाकुर, रोगही देवी, रमणजी ठाकुर, अहमद दर्जी, लुढ़की नायक की पत्नी व जटाशंकर झा की पत्नी की जान ले ली।

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कैंसर से जूझ रहे ये लोग :

अभी दोनों गांवों में एक दर्जन से अधिक लोग कैंसर से पीड़ित बताए जा रहे हैं। पोहदी गांव के गुलाब शेख, कर्पूरी देवी, राजो देवी, सिरोही देवी, विमला देवी, राम ललित झा, नजराना खातून कैंसर, महिनाम गांव में जटाशंकर मिश्र, कौशलेन्द्र मिश्र, भोगिया देवी, रामपरी देवी, बैतरणी देवी व उमेश मिश्र को कैंसर की पुष्टि हो चुकी है।

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प्रदूषित जल से पसर रहा कैंसर, किसी ने नहीं दिया ध्यान :

कैंसर की चपेट में आकर जान गंवाने वाले अधिकांश लोग गरीब तबके के हैं। समुचित इलाज नहीं मिलने से इनकी मौत की बात सामने आई है। वर्ष 2018 के मई माह में डॉक्टरों की टीम महिनाम गांव पहुंचकर कैंसर पीड़ितों की जांच-पडताल कर चुकी है। टीम में वर्तमान सिविल सर्जन डॉ. अमरेन्द्र नारायण झा भी शामिल थे। हालांकि, इस जांच के बाद कोई समाधान नहीं निकला और कैंसर पीड़ित भगवान भरोसे छोड़ दिए गए। दोनों गांवों के लोगों ने डेढ़ वर्ष पहले इस संबंध में स्थानीय से लेकर पटना तक के वरीय पदाधिकारियों को आवेदन दिया। इसके बाद बेनीपुर के तत्कालीन एसडीओ अमित कुमार ने अभियंताओं की टीम को महिनाम गांव भेजकर चापाकलों के पानी का आर्सेनिक जांच करवाया था। इन गांवों में कैंसर के पसरने का मुख्य कारण आर्सेनिक युक्त जल का होना बताया गया, लेकिन आज तक उन गांवों में आर्सेनिक से बचाव के लिए कोई प्लांट नहीं लग सका। ग्रामीण कहते हैं कि किसी जनप्रतिनिधि ने इस गंभीर समस्या पर अब तक उचित ध्यान नहीं दिया।-----------

स्वास्थ्य सेवाओं का घोर अभाव :अनुमंडल मुख्यालय से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित महिनाम व पोहद्दी गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं का घोर अभाव है। महिनाम में 25 वर्ष पहले एक उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था। उस केंद्र पर पिछले पांच सालों से ना डॉक्टर हैं ना एएनएम। वर्ष 2008 में महिनाम गांव में राज्य सरकार के तत्कालीन मंत्री स्व. भोला सिंह ने एक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास किया, लेकिन आज तक यह बन नहीं सका। बताते हैं कि मंत्री ने सरकार से बिना स्वीकृति के ही शिलान्यास कर दिया था। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अनुमंडलीय अस्पताल ही सहारा है।

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सरकार व प्रशासन उदासीन, लोगों में बढ़ रहा आक्रोश : सरकारी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण लगातार कैंसर पीडितों के मरने की सिलसिला जारी है। चापाकल के पानी में आर्सेनिक रहने के कारण बीमारी फैल रही है। गांव में आर्सेनिक प्लांट लगाकर लोगों को अविलंब शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।

- महेंद्र झा आजाद, पूर्व विधायक

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इस गांव के लोग कई बार स्थानीय पदाधिकारी से लेकर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव तक को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी बीमारी की रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब आंदोलन करने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

- रमेश झा, ग्रामीण

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गरीब लोगों को देखनेवाला कोई नहीं है। कैंसर पीडितों व उनके परिवारों में त्राहि-त्राहि मची है। अधिकांश कैंसर पीड़ित गरीब तबके के हैं, जिनके पास इलाज कराने के लिए रुपये नहीं हैं। इसे देखने वाला कोई नहीं हैं। ना तो इलाज की कोई व्यवस्था, ना रोकथाम के उपाय, कुछ नहीं हो रहे।

- झमेली महतो, पूर्व मुखिया

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पोहद्दी गांव की स्थिति कैंसर के मामले में विकराल होती जा रही है। लगातार लोग कैंसर की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए उच्चस्तरीय कदम उठाए जाने की जरूरत है। सबसे गुहार लगा चुके हैं। किसी का ध्यान इस समस्या पर नहीं है।

कैलाश झा, ग्रामीण

Posted By: Jagran