बिहार में पिता की गुप्त सेवा को बेटों ने दिया नया आयाम, दरभंगा में हर शुक्रवार दिखता है अनोखा नजारा
Sons Continue Father Legacy : श्याम सुंदर जसराजपुरिया ने वर्षों तक गुप्त रूप से गरीबों को भोजन कराया; उनके निधन ...और पढ़ें

लोगों को भोजन कराते श्याम सुंदर जसराजपुरिया के स्वजन व मौके पर चैंबर के प्रधान महासचिव। जागरण
HighLights
श्याम सुंदर जसराजपुरिया ने गुप्त रूप से गरीबों को भोजन कराया।
उनके बेटों राजेश और मुकेश ने सेवा परंपरा जारी रखी।
दरभंगा में हर शुक्रवार 400 जरूरतमंदों को स्वादिष्ट भोजन।
मुकेश कुमार श्रीवास्तव, दरभंगा। सच्ची सेवा के लिए न तो प्रचार की जरूरत होती है और न ही किसी पहचान की। सेवा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ और दिखावे के जरूरतमंद तक पहुंचे।
दरभंगा गुदरी बाजार निवासी श्याम सुंदर जसराजपुरिया ने भी जीवन में सेवा का ऐसा ही उदाहरण पेश किया। वे हर शुक्रवार को गरीबों को भोजन कराते थे, लेकिन अपने इस सेवा कार्य की जानकारी तक परिवार के सदस्यों को नहीं देते थे।
चुपचाप जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था करते और स्वयं सेवा में जुटे रहते थे। भोजन की पूरी व्यवस्था वे बाहर ही करते थे। 10 मई 2025 को उनके निधन के बाद जब उनके बेटों को पिता के इस गुप्त सेवा कार्य की जानकारी मिली तो वे भावुक हो गए।
पिता ने वर्षों तक जिस सेवा परंपरा को बिना किसी प्रचार के निभाया, उसे आगे बढ़ाने का दोनों बेटों ने संकल्प लिया। बड़े पुत्र राजेश और छोटे पुत्र मुकेश अब हर शुक्रवार अपने घर के बाहर जरूरतमंदों को भरपेट भोजन कराते हैं।
करीब चार सौ लोग प्रत्येक शुक्रवार इस भोजन सेवा का लाभ उठाते हैं। उनका कहना है कि पिता ने जिस भावना से यह सेवा शुरू की थी, उसे जारी रखना ही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।
दोनों भाइयों ने बताया कि वर्तमान में प्रत्येक शुक्रवार दिन के 12 बजे से जरूरतमंद लोग भोजन करते हैं। जो शाम तक चलता है। आने वाले दिनों में इस सेवा को और बेहतर एवं व्यापक बनाने की तैयारी है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाया जा सके।
कहा कि पिता की ओर से शुरू की गई मानव सेवा को आगे बढ़ाने से परिवार को आत्मिक सुकून मिलता है। साथ ही, पिता की परंपरा को निभाने से पूरे परिवार को गर्व भी महसूस होता है।
लोग कहते है कि सच्ची सेवा केवल दिखावे की मोहताज नहीं होती। एक व्यक्ति की नेक पहल उसके जाने के बाद भी परिवार के संस्कारों के माध्यम से आगे बढ़ सकती है और समाज के सैकड़ों जरूरतमंद लोगों के लिए सहारा बन सकती है।

खाना में मिठाई से लेकर पनीर मसाला तक
इस सेवा की खास बात यह है कि जरूरतमंदों को सामान्य भोजन नहीं, बल्कि स्वादिष्ट और भरपेट खाना कराया जाता है। भोजन में पनीर मसाला सहित विभिन्न व्यंजन रहते हैं।
भोजन के साथ मिठाई भी दी जाती है। ,श्याम सुंदर जसराजपुरिया के बेटों का प्रयास रहता है कि भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था में किसी तरह की कमी न रहे।खाने वाले की संतुष्टि ही, उनके लिए आशीर्वाद है।
परिवार को हर शुक्रवार के दिन का इंतजार रहता है। खाने वाले लोगों को कोई परेशानी नहीं हो इे लेकर परिवार के हर सदस्य अपने काम-धंधा को छोड़कर भोजन कराने में व्यस्त रहते हैं।

चैंबर ने की सराहना
डिवीजन चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रधान सचिव सुशील जैन ने जसराजपुरिया परिवार के सेवा कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि इंसान को केवल व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग की सेवा से बढ़कर पुण्य का दूसरा कोई मार्ग नहीं है। ऐसे कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और अन्य लोगों को भी सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
श्याम सुंदर जसराजपुरिया ने जीवन में चुपचाप सेवा की और उनके जाने के बाद वही सेवा उनके बेटों के संस्कारों के माध्यम से आगे बढ़ रही है।
हर शुक्रवार सैकड़ों जरूरतमंदों की थाली में भोजन पहुंचना उनके लिए पिता को याद करने का माध्यम ही नहीं, बल्कि उनकी विरासत को जीवित रखने की एक मिसाल भी है।
