25 साल का इंतजार खत्म, फिर सजा इंद्र भगवान का रथ, दरभंगा में लौटी राजघराने की परंपरा
दरभंगा राजघराने की करीब सवा सौ साल पुरानी ऐतिहासिक इंद्र पूजा की परंपरा 25 साल बाद फिर से जीवंत हो ...और पढ़ें

रथ पर विराजमान इंद्र भगवान। जागरण
जागरण संवाददाता, दरभंगा । दरभंगा राजघराने की करीब सवा सौ साल पुरानी ऐतिहासिक इंद्र पूजा की परंपरा नए स्वरूप में फिर जीवंत हो उठी। 25 वर्षों से बंद इंद्र भगवान के रथ को इस बार आकर्षक ढंग से सजाकर रामबाग से निकाला गया।
कदम की लकड़ी से निर्मित इंद्र ध्वज, इंद्र भगवान सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की पूजा के बाद रथ को इंद्र भवन के लिए रवाना किया गया। धार्मिक न्यास के ट्रस्टी कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपीलेश्वर सिंह के नेतृत्व में पूजा की परंपरागत प्रक्रिया शुरू हुई।
रामबाग में महिलाओं व पुरुषों ने इंद्र भगवान की स्तुति करते हुए रथ को विदा किया। पूजा से पूर्व कदम की लकड़ी से निर्मित इंद्र ध्वज और प्रतिमाओं का कंकाली मंदिर के समीप पोखर में नौकायन कराया गया। इसके बाद विद्वान पंडितों ने संकल्प लेकर पूजा-अर्चना की। सात दिवसीय इंद्र पूजा राज मैदान स्थित ऐतिहासिक इंद्र भवन में शुरू हुई।
1898 में महाराजा रामेश्वर सिंह ने शुरू की थी पूजा
बताया जाता है कि मिथिला में अकाल के दौरान लोगों को राहत दिलाने की कामना से महाराजा रामेश्वर सिंह ने वर्ष 1898 में इंद्र पूजा की शुरुआत की थी। अंतिम महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के समय यह आयोजन भव्य स्वरूप में होता था।
देश-विदेश के प्रसिद्ध कलाकार यहां पहुंचते थे। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां सहित कई नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियों से इंद्र पूजा परिसर गुलजार रहता था।
समय के साथ मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की परंपरा लगभग समाप्त हो गई, लेकिन राजघराने की ओर से पूजा आज भी परंपरागत रूप से जारी है।

कीचड़ और जलजमाव के बीच पहुंचेंगे श्रद्धालु
ऐतिहासिक आयोजन के बीच राज मैदान की बदहाली श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा रही है। इंद्र भवन तक जाने वाली सड़क समेत मैदान का बड़ा हिस्सा जलजमाव, कीचड़ और जलकुंभी से पटा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार महीनों से यहां जलजमाव की समस्या बनी हुई है। इंद्र भवन और राज हाईस्कूल के बीच बड़े नाले का पानी मैदान में फैलता है।
वर्षों से बंद अंडरग्राउंड नाले के कारण जलनिकासी की समस्या और गंभीर हो गई है। श्रद्धालुओं को इसी कीचड़ और जलजमाव के बीच इंद्र भगवान के दर्शन के लिए पहुंचना होगा।
पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीद
राजघराने की ओर से अगले वर्ष इंद्र पूजा को और भव्य व पारंपरिक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। आयोजन को पर्यटन से जोड़ने की पहल होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
कदम वृक्ष की धार्मिक महत्ता
कदम को देव वृक्ष और भगवान कृष्ण का प्रिय वृक्ष माना जाता है। मान्यता है कि कृष्ण कदम के नीचे बांसुरी बजाते और गोपियों संग लीलाएं करते थे। इसके फूल मां लक्ष्मी की पूजा में चढ़ाए जाते हैं।
धार्मिक मान्यता में कदम की परिक्रमा को बाधा निवारण से जोड़ा गया है। औषधीय गुणों से युक्त कदम की छाल, पत्ते व अन्य हिस्से घाव भरने सहित विभिन्न उपचारों में उपयोग किए जाते हैं।
