दरभंगा में जमीन रजिस्ट्री का बदला तरीका, पेपरलेस व्यवस्था से कागजी झंझट से राहत
दरभंगा में 17 अगस्त से पेपरलेस जमीन निबंधन व्यवस्था लागू होने से कागजी झंझट कम हो रहा है। शुरुआती चुनौतियों ...और पढ़ें

इसमें एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
दरभंगा में 17 अगस्त से पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू।
कागजी झंझट से राहत, प्रक्रिया हुई अधिक पारदर्शी।
रजिस्ट्री की संख्या बढ़ी, पर शुल्क में वृद्धि।
संवाद सहयोगी, दरभंगा। जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए अब कागजों की मोटी फाइल लेकर निबंधन कार्यालय पहुंचने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
दरभंगा जिला निबंधन कार्यालय में 17 अगस्त से पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से आगे बढ़ रही है।
शुरुआती दिनों में लोगों को नई व्यवस्था समझने में परेशानी हुई, लेकिन अब इसकी जानकारी लेने के लिए लोग स्वयं कार्यालय पहुंच रहे हैं। इसका असर रजिस्ट्री की संख्या पर भी दिखने लगा है।
शुरुआत में जहां दो-चार दस्तावेज निबंधित हो रहे थे, वहीं संख्या बढ़कर छह-आठ तक पहुंची और सोमवार को 14 दस्तावेजों का निबंधन हुआ।
कागजी झंझट से मिलेगी राहत
पेपरलेस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जमीन की रजिस्ट्री के लिए कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होने के कारण दस्तावेजों के रखरखाव और कागजों की फाइल संभालने की परेशानी कम होगी। इससे आने वाले समय में निबंधन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
खुद जानकारी लेने पहुंच रहे लोग
नई व्यवस्था लागू होने के बाद शुरुआती दिनों में रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या में कमी आई। डीडराइटरों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण भी लोगों को परेशानी हुई।
अब जमीन खरीदने और बेचने वाले लोग सीधे निबंधन कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से प्रक्रिया की जानकारी ले रहे हैं। इससे लोगों में पेपरलेस निबंधन को लेकर समझ धीरे-धीरे विकसित हो रही है।
14 दस्तावेज हुए निबंधित
17 अगस्त से शुरू हुई नई व्यवस्था के बाद शुरुआती दिनों में प्रतिदिन दो-चार दस्तावेजों का निबंधन हुआ। इसके बाद संख्या बढ़कर छह-आठ तक पहुंची। सोमवार को जिला निबंधन कार्यालय में 14 दस्तावेज निबंधित किए गए।
निबंधन पदाधिकारी स्वीटी सुमन ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद शुरुआती दौर में भूमि निबंधन की संख्या में कमी आई थी। अब लोग स्वयं कार्यालय आकर प्रक्रिया समझ रहे हैं और जमीन का निबंधन करा रहे हैं।
डीडराइटरों के विरोध से परेशानी
जिला निबंधन कार्यालय में डीडराइटरों की ओर से पेपरलेस व्यवस्था का विरोध किया जा रहा है। इसके कारण जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है।
दूसरी ओर, तकनीकी जानकारी के अभाव में आम लोगों को भी नई व्यवस्था समझने में परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए निबंधन कार्यालय की ओर से पर्याप्त सहयोग और मार्गदर्शन मिलना जरूरी है।
बढ़ा राजस्व लक्ष्य, शुल्क का भी असर
पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के साथ निबंधन विभाग ने जिले के लिए राजस्व लक्ष्य भी बढ़ाया है। कई मौजों को व्यावसायिक मूल्य के आधार पर चिह्नित किया गया है।
इसके कारण जमीन के निबंधन पर लगने वाले स्टांप शुल्क सहित अन्य शुल्क में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में एक ओर पेपरलेस व्यवस्था से कागजी झंझट कम होने की उम्मीद है, वहीं बढ़े शुल्क से जमीन खरीदने और बेचने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
