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दरभंगा में दादा के दर्ज कराए मुकदमे से 44 साल बाद पोते ने पाया छुटकारा राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह

Published: Sat, 12 Sep 2026 11:18 PM (IST)

Darbhanga Lok Adalat Settlement: दरभंगा में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान एक पोते ने अपने दादा द्वारा 44 साल पहले ...और पढ़ें

मुकदमा समाप्ति के वाद पक्षकार को एवार्ड प्रदान करते प्रभारी जिला जज संतोष कुमार पाण्डेय, सचिव आरती कुमारी, एसडीजेएम सत्यम,अधिवक्ता एवं पक्षकार! फोटो जागरण

मुकदमा समाप्ति के वाद पक्षकार को एवार्ड प्रदान करते प्रभारी जिला जज संतोष कुमार पाण्डेय, सचिव आरती कुमारी, एसडीजेएम सत्यम,अधिवक्ता एवं पक्षकार! फोटो जागरण 

संवाद सहयोगी, दरभंगा। Darbhanga Lok Adalat Settlement: दादा द्वारा 44 वर्ष पूर्व दर्ज कराए गए एक आपराधिक मुकदमे से पोते ने राष्ट्रीय लोक अदालत में समझौता कर स्थायी मुक्ति पा ली।

दरभंगा सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति से वर्ष 1982 से लंबित लहेरियासराय थाना कांड संख्या 147/1982 का सुखद अंत हो गया।

दोनों पक्षों ने पेश किया सुलहनामा

अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सत्यम की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से लिखित सुलहनामा प्रस्तुत किया।

वर्ष 1982 में दुमदुमा निवासी सगीर अंसारी ने मो. इनामुल हक समेत छह लोगों पर मारपीट और छीना-झपटी का केस दर्ज कराया था। लंबी सुनवाई के दौरान सूचक और चार आरोपियों की मृत्यु हो चुकी थी।

पोते ने खत्म किया पुराना विवाद

सगीर अंसारी के पौत्र मोदीस्सफ ने जीवित बचे आरोपी मो. इनामुल हक और मो. सुल्तान के साथ आपसी सहमति से समझौता कर लिया।

इसके बाद प्रभारी जिला जज संतोष कुमार पांडेय और जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने दोनों पक्षों को मुकदमा समाप्ति का प्रमाण पत्र सौंपा।