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दरभंगा में कृष्ण जन्मोत्सव का दिखेगा दिव्य नजारा, 108 किलो का केक काटेंगे, 1008 व्यंजनों का लगेगा भोग

Published: Fri, 04 Sep 2026 06:00 AM (IST)

दरभंगा के शुभंकरपुर स्थित 212 वर्ष पुराने राधा-कृष्ण मंदिर में भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस्कॉन द्वारा आयोजित इस उत्सव ...और पढ़ें

मंदिर परिसर में स्थापित राधा कृष्ण बलदेवजी की मूर्ति। जागरण

मंदिर परिसर में स्थापित राधा कृष्ण बलदेवजी की मूर्ति। जागरण 

HighLights

  1. 212 वर्ष पुराने राधा-कृष्ण मंदिर में भव्य जन्माष्टमी उत्सव।

  2. 108 किलो का केक, 1008 व्यंजनों का भोग लगेगा।

  3. 40 हजार श्रद्धालु, देश-विदेश से हरिनाम संकीर्तन में शामिल होंगे।

मुकेश कुमार श्रीवास्तव, दरभंगा। दरभंगा शहर के शुभंकरपुर महराजीपुल स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में शुक्रवार को और शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव भव्य अंदाज में मनाया जाएगा।

करीब 212 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर में इस्कान की ओर से चार सितंबर को विशेष आयोजन होगा। जन्मोत्सव पर 108 किलो का केक कटेगा। भगवान श्रीकृष्ण को 1008 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा।

आयोजन में करीब 40 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। रूस, म्यांमार, मारीशस समेत कई देशों से एक दर्जन से अधिक सहित विभिन्न राज्यों से सैकड़ों भक्त हरिनाम महामंत्र संकीर्तन के लिए आने लगे हैं।

सभी के ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान भगवान का अभिषेक, महाभिषेक और भव्य महाआरती आकर्षण होंगे। पांच सितंबर को नंदोत्सव और हांडी उत्सव का आयोजन किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में स्थायी शेड का निर्माण कराया जा रहा है। यह मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए भी प्रसिद्ध है। इसका निर्माण समुद्री जहाज के आकार में किया गया है।

मंदिर का एक हिस्सा बागमती नदी और दूसरा परिसर के बगीचे की ओर है। भगवान का स्थान पहली मंजिल पर है, जहां घुमावदार सीढ़ियों से लोग पहुंचते हैं। पहली मंजिल पर बगीचा भी बनाया गया है। करीब पांच बीघे में फैला यह मंदिर परिसर दरभंगा के शांत और रमणीय स्थलों में शुमार है।

मंगल आरती से महाआरती तक गूंजेगा हरि नाम

जन्माष्टमी को लेकर मंदिर में भक्ति और आस्था का उल्लास छाएगा। मंगल आरती से शुरू होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला मध्यरात्रि में महाआरती और महाप्रसाद वितरण के साथ संपन्न होगा।

प्रबंधक लक्ष्मण कृपा प्रभु ने बताया कि जन्माष्टमी पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 4:30 बजे मंगल आरती से होगी। इसके बाद सुबह 7:30 बजे गुरु पूजा, आठ बजे कृष्ण कथा और नौ बजे शृंगार आरती का आयोजन होगा।

दोपहर 12:30 बजे राजभोग आरती की जाएगी। संध्या सात बजे संध्या आरती के बाद रात 11 बजे भगवान श्रीश्री राधाकृष्ण बलदेवजी का 1008 पावन तीर्थों के जल व पंचगव्य आदि से महाभिषेक किया जाएगा।

रात्रि के 11:45 बजे भगवान को 1008 व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। मध्यरात्रि 12 बजे महाआरती होगी। इस दौरान 108 किलो का केक काटकर भव्य और दिव्य जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

इसके करीब आधे घंटे बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। इस दौरान शाम पांच बजे से रात्रि के 11 बजे तक मंदिर परिसर में अभिषेक का आयोजन होगा। वहीं, सुबह नौ बजे से मध्यरात्रि 12 बजे तक कीर्तन एवं भजन का कार्यक्रम निरंतर चलता रहेगा। बताया कि भक्तों का आगमन शुरू हो गया है।

अगले दिन दही-हांडी कार्यक्रम

कार्यक्रम के अगले दिन पांच सितंबर को सुबह 7:30 बजे गुरु पूजा, आठ बजे प्रभुपाद गुणगान और 11 बजे अभिषेक का आयोजन होगा। दोपहर 12:30 बजे भोग एवं आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा।

शाम चार बजे से दही-हांडी कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसके अलावा, राधाष्टमी महोत्सव का आयोजन 19 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक किए जाने की घोषणा की गई है।

स्थायी शेड से बदलेगी परिसर की रंगत

श्रद्धालुओं की सुविधा और ऐतिहासिक परिसर के संरक्षण के उद्देश्य से इस्कान की ओर से मंदिर परिसर में स्थायी शेड का निर्माण कराया जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों को सुविधा मिलेगी और परिसर का स्वरूप भी निखरेगा।

धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।