दरभंगा में 30 लाख की जमीन का 2.38 लाख रेट, भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों ने उठाए सवाल
दरभंगा में किसान आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वे बाजार ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। जमीन का बाजार भाव आसमान छू रहा है, लेकिन सरकारी कागजों में वर्षों पुरानी दर ही जमीन की कीमत तय कर रही है।
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित एलिवेटेड कारिडोर के लिए भूमि के पुन: अधिग्रहण को लेकर किसानों का आक्रोश इसी अंतर को लेकर है।
किसानों का कहना है कि मनोरा मौजे में जिस जमीन की वर्तमान बाजार दर करीब 30 लाख रुपये प्रति कट्ठा है, उसका मुआवजा वर्ष 2013 के सर्किल रेट के आधार पर तय किया जा रहा है।
90 लाख मुआवजे की मांग
किसान मोर्चा के प्रतिनिधि सेवानिवृत्त कर्नल पीके चौधरी ने कहा कि बहादुरपुर प्रखंड के मनोरा, पोखरशाम, बलभद्रपुर और इंदिरा कालोनी की कृषि भूमि परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है।
उन्होंने कहा कि मनोरा में जमीन की वर्तमान बाजार दर करीब 30 लाख रुपये प्रति कट्ठा है। अधिनियम की धारा 26 के अनुसार बाजार दर का तीन गुना मुआवजा 90 लाख रुपये प्रति कट्ठा होना चाहिए। इसके विपरीत 2.38 लाख रुपये प्रति कट्ठा के पुराने सर्किल रेट से मुआवजा तय किए जाने पर किसानों ने आपत्ति जताई है।
चार साल पहले भी जताई थी नाराजगी
किसानों के अनुसार, चार साल पहले भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित जमीन का मुआवजा भी बाजार दर से कम मिला था। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। किसानों ने व्यावसायिक, कृषि और सड़क किनारे की जमीन का मूल्यांकन एक ही दर से किए जाने पर भी सवाल उठाया है।
400 करोड़ के कारिडोर पर सवाल
किसानों ने मनोरा से कर्पूरी चौक के बीच करीब तीन किलोमीटर के लिए प्रस्तावित 400 करोड़ रुपये के एलिवेटेड कारिडोर की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया।
उनका कहना है कि एम्स का स्थान बदलने और आसपास दो अन्य चार लेन सड़कें उपलब्ध होने के बाद इस परियोजना की जरूरत पर पुनर्विचार होना चाहिए। किसानों के अनुसार, पूर्व स्वीकृत नक्शे में निर्माण नहर के ऊपर प्रस्तावित था, जिससे उनकी जमीन और आवास प्रभावित होने से बच सकते थे।
