दरभंगा में दो बीडीओ पर शिकंजे के बाद शिक्षा भवन में कानाफूसी, रंग-रोगन और भुगतान पर उठे सवाल
दरभंगा में निगरानी की कार्रवाई के बाद शिक्षा भवन में हड़कंप मच गया है। रंग-रोगन के भुगतान और प्रधानाध्यापकों से ...और पढ़ें
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दरभंगा जिले में शिक्षा भवन।
HighLights
निगरानी की कार्रवाई से दरभंगा शिक्षा भवन में हलचल।
रंग-रोगन और साज-सज्जा के भुगतान पर उठे सवाल।
प्रधानाध्यापकों से 'सहयोग' के नाम पर राशि लेने का आरोप।
संवाद सहयोगी, दरभंगा। दरभंगा में एक महीने के अंतराल पर निगरानी एवं आर्थिक अपराध इकाई की दूसरी कार्रवाई ने सरकारी महकमों में हलचल बढ़ा दी है। केवटी के बाद अब बहादुरपुर बीडीओ के खिलाफ हुई कार्रवाई से शहर के करमगंज स्थित शिक्षा भवन में भी पुराने घटनाक्रम की यादें ताजा हो गई हैं।
वहां तैनात अधिकारी और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज है कि निगरानी की अगली नजर कहीं शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों पर न पड़ जाए।
शिक्षा भवन के निचले तल पर 19 अप्रैल 2023 को निगरानी की टीम ने बिहार शैक्षणिक आधारभूत संरचना निगम के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार और अनिल कुमार जायसवाल को दो लाख रुपये रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था।
उस कार्रवाई के बाद शिक्षा भवन में लंबे समय तक निगरानी की सक्रियता को लेकर चर्चा रही थी। अब हाल की कार्रवाई के बाद कर्मचारियों के बीच उसी तरह की किसी कार्रवाई की आशंका को लेकर कानाफूसी शुरू हो गई है।
रंग-रोगन और साज-सज्जा के भुगतान पर उठ रहे सवाल
शिक्षा भवन में इन दिनों रंग-रोगन और साज-सज्जा का काम चल रहा है। आरोप है कि इस काम की आड़ में शिक्षा परियोजना की गणन शाखा से जुड़े एक कर्मचारी ने अपने संबंधी को आगे कर ठेकेदारी के माध्यम से भुगतान का रास्ता तैयार किया है।
दावा किया जा रहा है कि इसके जरिए लाखों रुपये के भुगतान का खेल चल रहा है। इसकी भनक संबंधित एजेंसी को लग गई है। बताया जा रहा है कि भवन के रंग-रोगन के लिए सरकार की ओर से करीब 20 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए थे।
इसके बाद करीब 60 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग भेजे जाने की भी चर्चा है। इतनी बड़ी राशि की मांग ने भी विभागीय स्तर पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रधानाध्यापकों से 'सहयोग' के नाम पर राशि लेने का आरोप :
मामला केवल भवन के रंग-रोगन तक सीमित नहीं है। आरोप है कि विभागीय स्तर पर प्रधानाध्यापकों से भी सहयोग के नाम पर राशि लेने का दबाव बनाया गया। यदि तीन हजार प्रधानाध्यापकों से पांच-पांच हजार रुपये लेने के आरोप की जांच की जाए तो यह राशि डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
हालांकि, वास्तविक रूप से कितनी राशि ली गई, किसके निर्देश पर ली गई और इसका उपयोग कहां हुआ, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। शिक्षकों के बीच सबसे ज्यादा नाराजगी प्रखंड साधन केंद्र के लेखापाल से जुड़े आपूर्ति कार्यों को लेकर बताई जा रही है।
कुछ शिक्षकों का आरोप है कि आपूर्ति संबंधी प्रक्रिया में अनियमितता और कथित लेनदेन से जुड़े सवाल लंबे समय से उठ रहे हैं। अब कुछ शिक्षक इन शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के साथ निगरानी विभाग तक जाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।
यदि शिकायतें औपचारिक रूप से निगरानी या आर्थिक अपराध इकाई तक पहुंचती हैं तो शिक्षा भवन में चल रहे भुगतान, निर्माण, रंग-रोगन, साज-सज्जा और आपूर्ति से जुड़े कार्यों की जांच का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित पदाधिकारी स्पष्ट रूप से कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।
ऐसा तो कोई मामला नहीं है। जो भी रकम आई है ,सबका हिसाब है। उपयोगिता भी जा रहा है। अगर कोई बाहर से राशि लेगा तो वह जवाब देगा।
-विद्यानंद ठाकुर, डीईओ, दरभंगा।
