दरभंगा के डीएमसीएच में एंटी रैबीज सीरम किल्लत से बढ़ी मरीजों की परेशानी व खर्च
दरभंगा के डीएमसीएच में एंटी रैबीज सीरम की किल्लत से आवारा जानवरों के काटने से घायल मरीजों की परेशानी और ...और पढ़ें

डीएमसीएच के पीएसएम विभाग में चिकित्सक से परामर्श लेते मरीज। जागरण
HighLights
डीएमसीएच में एंटी रैबीज सीरम की छह माह से किल्लत।
आवारा जानवरों के काटने से घायल मरीजों की बढ़ी परेशानी।
मरीजों को बाजार से 3500 रुपये में खरीदना पड़ रहा सीरम।
संवाद सहयोगी, दरभंगा। आवारा कुत्ता, बंदर और सियार के काटने से पीड़ित गंभीर मरीजों की परेशानी बढ़ी हुई है। दरभंगा मेडिकल कालेज अस्पताल (डीएमसीएच) में एंटी रैबीज सिरम किल्लत के चलते मरीजों को बाजार से खरीदना पड़ रहा है।
गरीब मरीज खर्च बढ़ने से व्यवस्था को कोसते दिखते हैं। डीएमसीएच के प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (पीएसएम) विभाग के आंकड़े बताते हैं कि रोजाना 40 से 50 लोग कुत्ते-बंदर से जख्मी होकर उपचार के लिए आते हैं।
इसमें कई गंभीर जख्मी मरीज होते हैं। ऐसे जख्मियों को चिकित्सक टेटवैक के साथ एंटी रेबीज सीरम लेने का परामर्श देते हैं। इसके बावजूद पीएसएम विभाग में एंटी रैबीज सीरम की आपूर्ति छह-सात माह से ठप है।
इसके चलते उत्तर बिहार के विभिन्न जिला अस्पतालों एवं पीएचसियों से रेफर होकर आनेवाले मरीज के स्वजन बाजार से सीरम खरीदारी को विवश बने हैं।
बताया जाता है कि जिले के पीएचसी से लेकर मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, सीतामढ़ी आदि जिलों में एंटी रैबीज सीरम उपलब्ध नहीं रहता है। इसके चलते मरीजों को डीएमसीएच रेफर किया जाता है।
डीएमसीएच में सीरम नहीं मिलने पर मरीज व स्वजन मजबूर होकर 3500 में निजी मेडिकल शाप से सीरम खरीदकर लाते हैं। इसके बाद उनका उपचार हो पाता है। डीएमसीएच के उपाधीक्षक डा. अमित कुमार ने कहा, पीएसएम विभाग में इंजेक्शन उपलब्ध है। एंटी रेबीज सीरम की आपूर्ति के लिए बीएमएसआईसीएल को कई पत्र लिखा गया है। दोबारा पत्र भेजा जाएगा।
सीएम साइंस कालेज में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
दरभंगा। मिथिला स्टूडेंट यूनियन की ओर से मंगलवार को सीएम साइंस कालेज में प्रधानाचार्य को महाविद्यालय में व्याप्त विभिन्न समस्याओं एवं शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार को लेकर 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया।
आवेदन महाविद्यालय अध्यक्ष आलोक झा के नेतृत्व में दिया गया। संगठन की ओर से सौंपे गए मांग पत्र में छात्र संघ चुनाव कराने, सीसीटीवी कैमरा लगाने, असामाजिक तत्वों पर रोक लगाने, कक्षाओं में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था, जर्जर भवन की मरम्मत, साफ-सफाई, बायज कामन रूम निर्माण, महिला सुरक्षा के लिए गार्ड की नियुक्ति, शौचालय एवं पेयजल व्यवस्था, पुस्तकालय में नई पुस्तकों की उपलब्धता आदि शामिल है। विश्वविद्यालय अध्यक्ष अनिश चौधरी ने कहा कि छात्रों की मूलभूत समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
