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मिथिलांचल की बंद चीनी मिलों के अच्छे दिन, किसानों के लिए सदस्यता अभियान शुरू

Published: Wed, 01 Jul 2026 02:37 PM (IST)

Bihar Sugarcane Farming:तीन दशकों से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों के पुनरुद्धार की उम्मीद जगी है, जिसके लिए ...और पढ़ें

सदस्यता अभियान की शुरुआत को चीनी मिलों को शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फाइल फोटो

सदस्यता अभियान की शुरुआत को चीनी मिलों को शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फाइल फोटो

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डिजिटल डेस्क, दरभंगा। Bihar Cooperative Mills: लगभग तीन दशकों से बंद पड़ी सकरी (मधुबनी) और रैयाम (दरभंगा) चीनी मिलों के दिन बहुरने वाले हैं।

मिथिलांचल के किसानों और आम जनता के लिए यह किसी बड़े सपने के सच होने जैसी उम्मीद है, क्योंकि इन मिलों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया की गति अब बेहद तेज हो चुकी है। 

इस दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाले 'सदस्यता अभियान' की शुरुआत सहकारिता विभाग द्वारा कर दी गई है। प्रस्तावित प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों से जुड़ने के लिए इच्छुक गन्ना उत्पादक किसान 30 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। 

जून 2026 में सरकार को सौंपी गई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के बाद, अब धरातल पर किसानों को इस मुहिम का हिस्सा बनाकर मिलों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है।

गन्ना किसानों के लिए सदस्यता की शर्तें 

बिहार सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल वही किसान इस समिति के सदस्य बन सकते हैं जो निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करते हों: 

  • आयु सीमा: आवेदक किसान की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी अनिवार्य है।

  • स्थानीय निवासी: किसान को संबंधित प्रस्तावित चीनी मिल के आयोजना (कमांड) क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।

  • खेती की प्रतिबद्धता: किसान वर्तमान में गन्ने की खेती करता हो या आगामी दो पेराई सत्रों में गन्ना उत्पादन का संकल्प लेता हो।

  • भूमि की अनिवार्यता: सामान्य वर्ग के किसानों के पास न्यूनतम 1 हेक्टेयर (लगभग 2.5 एकड़) तथा आरक्षित वर्ग के किसानों के पास कम से कम 50 डिसमिल भूमि होनी चाहिए।

  • पारिवारिक सीमा: एक परिवार से केवल एक ही सदस्य को समिति में शामिल होने की पात्रता होगी।

आवेदन प्रक्रिया और संपर्क सूत्र

किसान ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से या ऑफलाइन दोनों तरीकों से इस सदस्यता अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन या किसी भी तकनीकी सहायता के लिए किसान अपने स्थानीय पैक्स (PACS), प्रखंड स्तरीय ऑर्गेनाइजर समिति या विभाग द्वारा जारी किए गए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • सकरी चीनी मिल (मधुबनी) प्रतिनिधि: 9643354139

  • रैयाम चीनी मिल (दरभंगा) प्रतिनिधि: 9708786034, 7654965650

सदस्य बनने पर मिलने वाले लाभ

दरभंगा के वरीय सहकारिता पदाधिकारी हर्षवर्द्धन के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को गन्ने की खेती के लिए दोबारा प्रेरित करना है। एक बार जब पंजीकृत किसानों की संख्या और खेती के रकबे का सटीक डेटा मिल जाएगा, तो सरकार उसके अनुसार उन्नत बीज, खाद और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगी।

सदस्य किसानों को निम्नलिखित विशेष सुविधाएं दी जाएंगी:

  • गन्ने की उन्नत खेती के लिए कृषि आदानों (Inputs) की समय पर उपलब्धता।

  • मिट्टी जांच और कृषि विशेषज्ञों द्वारा मुफ्त तकनीकी मार्गदर्शन।

  • कृषि एवं गन्ना उद्योग विभाग की सभी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ।

  • उत्पादित गन्ने की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी और भुगतान प्रणाली में पूरी पारदर्शिता।

तीन दशकों के बाद खत्म होगा सूखा

उत्तर बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली ये दोनों मिलें 90 के दशक से ही बंद पड़ी हैं। पुरानी तकनीक, प्रशासनिक कुप्रबंधन, और किसानों के भुगतान में भारी देरी के कारण सकरी चीनी मिल 1993-96 के बीच बंद हो गई थी, वहीं बेहतरीन क्वालिटी की चीनी बनाने वाली रैयाम चीनी मिल भी 1994 से पूरी तरह ठप है। 

अब सरकार इन मिलों को ओडिशा और गुजरात के सफल सहकारी मॉडल पर पुनर्जीवित कर रही है, जिससे आगामी एक से दो वर्षों के भीतर मिलों को उत्पादन के लायक बना दिया जाएगा। 

लाखों की आबादी पर पड़ेगा सीधा असर

इन दोनों चीनी मिलों की प्रक्रिया शुरू होने से न सिर्फ दरभंगा और मधुबनी बल्कि समस्तीपुर और सीतामढ़ी के सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक सूरत बदलने की उम्मीद जागी है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव अनुमानित आंकड़े व लाभ
प्रभावित गांवों की संख्या मधुबनी के 24 और दरभंगा के 12 प्रखंडों के कुल 2,401 से अधिक गांवों को सीधा बाजार मिलेगा।
प्रत्यक्ष रोजगार आधुनिक प्लांट शुरू होने से मिल परिसरों में लगभग 1,500 से 2,000 लोगों को स्थायी और मौसमी नौकरियां मिलेंगी।
परोक्ष रोजगार लगभग 40,000 से 50,000 किसान, हजारों ट्रांसपोर्टर्स, ट्रैक्टर चालक और मिल के पास दुकान लगाने वाले 3,000 से 4,000 छोटे व्यापारियों को आजीविका मिलेगी।
पलायन पर रोक मिलों में चीनी के साथ-साथ इथेनॉल और बिजली उत्पादन (Co-generation) की योजनाओं से स्थानीय स्तर पर बूम आएगा, जिससे युवाओं का पलायन थमेगा।