Jitiya Vrat 2026 : ममता का कठिन इम्तिहान है जितिया, संतान की लंबी उम्र के लिए रखेंगी निर्जला व्रत
Jivitputrika Vrat 2026 : संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना के साथ माताएं निर्जला जितिया व्रत की ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
संतान की लंबी आयु और सुख के लिए माताएं रखेंगी निर्जला व्रत।
केवटी बाजारों में जितिया व्रत पूजन सामग्री की दुकानें सजीं।
जितिया व्रत की मान्यता महाभारत और कृष्ण से जुड़ी है।
संवाद सहयोगी, केवटी (दरभंगा)। संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना... हाथों में पूजा की सामग्री और मन में अटूट आस्था। इसी विश्वास के साथ माताएं एक बार फिर कठिन निर्जला जितिया व्रत की तैयारी में जुट गई हैं।
केवटी के बाजारों में व्रत से जुड़ी पूजन सामग्री की दुकानें सजने लगी हैं। बांस की डलिया से लेकर मरुआ का आटा, बजरी और फल की मांग बढ़ गई है। घरों में भी व्रत को लेकर तैयारी शुरू हो गई है।
तीन अक्टूबर को निर्जला व्रत
पंडित आदित्यनाथ झा ने बताया कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत किया जाता है। इस वर्ष तीन अक्टूबर शनिवार को महिलाएं निर्जला उपवास रखेंगी। अष्टमी तिथि तीन अक्टूबर की सुबह 10:02 बजे शुरू होकर चार अक्टूबर रविवार की सुबह 7:38 बजे तक रहेगी।
दो अक्टूबर को नहाय-खाय
मिथिला विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार दो अक्टूबर शुक्रवार को नहाय-खाय होगा। इस दिन विशेष भोजन ओगठन रात्रि के अंत तक अथवा संभव हो तो सुबह चार बजे तक किया जाना चाहिए। इसके बाद महिलाएं निर्जला व्रत के लिए संकल्प लेंगी।
जीमूतवाहन की होगी पूजा
तीन अक्टूबर को जीमूतवाहन पूजा, जितिया उपवास एवं महालक्ष्मी व्रत होगा। महिलाएं संतान की लंबी आयु, स्वस्थ जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से पूरे दिन निर्जला व्रत रखेंगी। व्रत को कठिन तपस्या के रूप में माना जाता है।
सजने लगीं पूजन सामग्री की दुकानें
जितिया को लेकर केवटी के बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। बांस की डलिया, मरुआ का आटा, बजरी समेत अन्य पूजन सामग्री की दुकानें सजने लगी हैं। फलों की बिक्री भी बढ़ गई है। दुकानदारों को व्रत के नजदीक आने के साथ कारोबार में और तेजी की उम्मीद है।
आस्था में दिख रहा महिलाओं का उत्साह
जितिया व्रत को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। घरों में व्रत की सामग्री जुटाने के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों की तैयारी भी शुरू हो गई है। माताओं के लिए यह केवल उपवास नहीं, बल्कि संतान के स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना से जुड़ा आस्था का पर्व है।
कृष्ण से जुड़ी है जीवित्पुत्रिका की मान्यता
जितिया व्रत की धार्मिक मान्यता महाभारत काल की कथा से जुड़ी बताई जाती है। मान्यता के अनुसार द्रोणाचार्य की मृत्यु और कौरवों की हार के बाद अश्वत्थामा ने पांडव शिविर में जाकर द्रौपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को भी ब्रह्मास्त्र से मारने का प्रयास किया।
कृष्ण ने बचाया गर्भस्थ शिशु
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में मृत शिशु को पुनर्जीवित किया। इसी कारण उसका नाम जीवित्पुत्रिका पड़ा। मान्यता है कि इसी प्रसंग से संतान की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना को लेकर जीवित्पुत्रिका व्रत की परंपरा जुड़ी।
चार अक्टूबर को होगा पारण
चार अक्टूबर रविवार को सुबह 7:38 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद महिलाएं पारण करेंगी। इसके साथ निर्जला जितिया व्रत पूरा होगा। केवटी समेत मिथिलांचल में पर्व को लेकर अभी से धार्मिक उत्साह और बाजारों में रौनक दिखाई देने लगी है।
