दरभंगा में दिव्यांगों-बुजुर्गों की बदलेगी जिंदगी, परीक्षण के बाद अब मिलने वाला है ये बड़ा सहारा
दरभंगा में दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को अब सहायक उपकरणों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। परीक्षण शिविरों के बाद ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। जिले के दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें चलने-फिरने, सुनने और रोजमर्रा के कामकाज में सहूलियत के लिए जरूरी सहायक उपकरण के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
भारत सरकार के सहयोग से चिह्नित पात्र लाभार्थियों को जल्द ही उनकी जरूरत के अनुसार व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र, बैसाखी, छड़ी, कृत्रिम अंग सहित अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए जिले में आयोजित परीक्षण शिविरों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब उपकरण वितरण की तैयारी शुरू कर दी गई है।
तीन जगहों पर हुआ परीक्षण
दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए जिले में तीन स्थानों पर परीक्षण शिविर आयोजित किए गए। बेनीपुर, बिरौल और दरभंगा के पोलो मैदान में लगे शिविरों में लाभार्थियों की जरूरत और दिव्यांगता की स्थिति का परीक्षण किया गया। परीक्षण के आधार पर पात्र लाभार्थियों को चिह्नित किया गया है।
सांसद ने उठाया था मुद्दा
दिव्यांगजनों और बुजुर्गों की जरूरतों को देखते हुए सांसद डा. गोपालजी ठाकुर ने इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया था। उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री वीरेंद्र कुमार से मुलाकात कर दरभंगा में विशेष शिविर आयोजित कराने का आग्रह किया था।
सांसद ने मांग की थी कि जिले के दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों का परीक्षण कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
मंत्री के निर्देश पर शुरू हुई प्रक्रिया
सांसद के आग्रह के बाद केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर संबंधित विभाग की ओर से दरभंगा में परीक्षण शिविर आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद बेनीपुर, बिरौल और पोलो मैदान में शिविर लगाए गए। परीक्षण शिविरों के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अब पात्र लाभार्थियों को उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
जरूरत के हिसाब से मिलेंगे उपकरण
पात्र लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग तरह के उपकरण दिए जाएंगे। इसमें व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र, बैसाखी, छड़ी और कृत्रिम अंग सहित अन्य सहायक उपकरण शामिल हैं। इससे दिव्यांगजनों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ ही बुजुर्गों को दैनिक गतिविधियों में सहूलियत होगी।
आत्मनिर्भर बनाने की पहल
सांसद डा. गोपालजी ठाकुर ने कहा कि दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। चिह्नित और पात्र लाभार्थियों को जल्द ही सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि उपकरण मिलने से लाभार्थियों को रोजमर्रा के काम करने में काफी सुविधा होगी। साथ ही दूसरों पर उनकी निर्भरता भी कम होगी।
जल्द शुरू होगा वितरण
परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब संबंधित स्तर पर लाभार्थियों के लिए उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इससे शिविर में शामिल दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को जल्द ही अपने उपयोग के उपकरण मिलने की उम्मीद है।
उपकरण मिलने के बाद उनके लिए घर से बाहर निकलना, आवागमन करना और दैनिक जरूरतों से जुड़े कई काम पहले की तुलना में आसान हो सकेंगे।
