दरभंगा में तीन माह से अटका नियोजित शिक्षकों का वेतन, दुकानदार बोले, अब नहीं मिलेगा उधार
Bihar Teacher Protest: दरभंगा में नियोजित शिक्षकों का तीन महीने का वेतन बकाया है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट और ...और पढ़ें

भुगतान नहीं होने के कारण शिक्षकों में भारी मायूसी और आक्रोश है। फाइल फोटो

समय कम है?
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संवाद सहयोगी, हायाघाट (दरभंगा)। Niyojit Shikshak Salary: बिहार में जीओबी (Government of Bihar) मद से आच्छादित नियोजित शिक्षकों का पिछले तीन महीने का वेतन बकाया होने के कारण शिक्षकों में भारी मायूसी और आक्रोश है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अब स्थानीय दुकानदारों ने भी शिक्षकों को रोजमर्रा का सामान उधार देने से साफ इनकार कर दिया है।
त्योहारों पर भी नहीं मिली राहत
बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ (मूल) के प्रदेश उपाध्यक्ष सह जिलाध्यक्ष रेजाउल्लाह ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य के इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है जब बकरीद जैसे बड़े महापर्व के अवसर पर भी नियोजित शिक्षकों को उनके तीन महीने का बकाया वेतन नहीं मिल सका। इस प्रशासनिक विफलता के कारण शिक्षक परिवारों के त्योहारों की खुशियां फीकी पड़ गईं।
परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट
वेतन न मिलने का सीधा असर शिक्षकों के घरेलू जीवन पर पड़ रहा है। शिक्षक जयंत भारद्वाज और रामलगन सरदार ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि पिछले तीन महीनों से मानदेय की राशि न मिलने से उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
पैसे की किल्लत के कारण बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनकी सेहत दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। घर के बीमार सदस्यों का समय पर बेहतर इलाज कराना भी अब दूभर हो गया है।
आंदोलन की राह पर शिक्षक
दुकानदारों द्वारा राशन और अन्य आवश्यक सामान उधार देने से मना करने के बाद शिक्षकों के सब्र का बांध टूट रहा है। पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि सरकार और विभाग की इस अनदेखी के कारण उनके पास अब आंदोलन का रास्ता चुनने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
क्यों अटकी नियोजित शिक्षकों की सैलरी?
बिहार में नियोजित शिक्षकों और बीपीएससी (BPSC) शिक्षकों के लिए वेतन भुगतान की दो अलग-अलग प्रणालियां काम करती हैं, जिसके कारण इस तरह की विसंगतियां सामने आती हैं:
मदों का पेंच (GOB बनाम SSA): नियोजित शिक्षकों का वेतन मुख्य रूप से दो फंड से आता है। पहला 'गोब मद' जो पूरी तरह राज्य सरकार देती है, और दूसरा 'एसएसए मद' जो केंद्र और राज्य के 60:40 के अनुपात से चलता है। दरभंगा के ये शिक्षक गोब मद के हैं, जहां आवंटन और प्रशासनिक फाइलों की लेत-लतीफी के कारण भुगतान फंसा हुआ है।
मैनुअल वेरिफिकेशन में देरी: बीपीएससी शिक्षकों का वेतन जहां सीएफएमएस (CFMS) और प्रान (PRAN) आधारित डिजिटल प्रणाली से सीधे स्टेट पूल से आता है, वहीं नियोजित शिक्षकों की अनुपस्थिति विवरणी (Attendance Sheet) को स्कूल के एचएम से लेकर बीईओ (BEO) और डीपीओ (DPO) स्तर तक मैनुअल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इस कूट-शृंखला में थोड़ी भी देरी पूरे जिले का वेतन अटका देती है।
प्रशासनिक ढुलमुल रवैया: शिक्षा विभाग द्वारा बजट आवंटित किए जाने के बावजूद निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा समय पर बिल ट्रेजरी में अपलोड न करने के कारण अक्सर ऐसी नौबत आती है। हालांकि, हाल ही में विभाग ने इस लापरवाही को लेकर सभी 38 जिलों के स्थापना डीपीओ को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।
जब तक इस व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन और सुगम नहीं बनाया जाता, तब तक जमीनी स्तर पर शिक्षकों को ऐसे आर्थिक और मानसिक तनाव से जूझना पड़ेगा।
