मुंबई में मुस्लिम युवती से प्रेम विवाह, बिहार आकर नाम बदलकर बनवाया अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र
बिरौल अनुमंडल में एक व्यक्ति ने मुस्लिम युवती से प्रेम विवाह कर उसका नाम बदलकर फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाया। इस ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
संवाद सहयोगी, कुशेश्वरस्थान (दरभंगा)। बिरौल अनुमंडल में फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाकर एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराने और सरकारी लाभ लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
मुंबई में प्रेम विवाह, गांव में नई पहचान
आरोप है कि बुचौली निवासी मंजय राम ने मुंबई में एक मुस्लिम युवती से प्रेम विवाह किया। विवाह के बाद युवती का नाम बदलकर अंकिता देवी रखा गया और उसे गांव लाया गया। इसके बाद स्थानीय स्तर पर उसके नाम से विभिन्न दस्तावेज तैयार कराने की कोशिश की गई।
रिश्तेदारों को बना दिया सास-ससुर
शिकायत के अनुसार मंजय राम ने पटनिया निवासी अपने रिश्तेदार देवेंद्र मोची और घुरनी देवी को युवती का ससुर और सास दर्शाया। इसी आधार पर अंकिता देवी के नाम से अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवा लिया गया।
एससी-एसटी एक्ट में केस और सरकारी लाभ
आरोप है कि फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर बड़गांव निवासी अखिलेंद्र कुमार सिंह और संजय कुमार सिंह के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इतना ही नहीं, अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण योजना के तहत सरकारी लाभ भी प्राप्त कर लिया गया।
शिकायत पर शुरू हुई जांच
दोनों पीड़ितों ने एसडीपीओ और बिरौल के अंचलाधिकारी (सीओ) को अलग-अलग आवेदन देकर पूरे मामले की जांच की मांग की। शिकायत के बाद सीओ ने राजस्व कर्मचारी श्रवण कुमार को जांच का जिम्मा सौंपा।
जांच में सामने आई सच्चाई
पूछताछ में घुरनी देवी ने स्पष्ट कहा कि उनकी अंकिता देवी नाम की कोई बेटी नहीं है और न ही उनकी किसी बेटी की शादी बुचौली में हुई है। उन्होंने बताया कि मंजय राम उनके रिश्तेदार हैं और करीब एक वर्ष पहले आधार कार्ड मांगकर ले गए थे। उन्हें आशंका है कि उसी आधार पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
मुखिया ने भी किया खुलासा
जांच के दौरान संबंधित पंचायत की मुखिया रीता देवी ने भी लिखित बयान में बताया कि दिए गए पते पर अंकिता देवी नाम की कोई महिला नहीं रहती। जांच रिपोर्ट में जाति प्रमाणपत्र प्रथमदृष्टया फर्जी प्रतीत होने की बात कही गई है।
अब कार्रवाई का इंतजार
प्रशासनिक जांच के बाद मामला गंभीर माना जा रहा है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि फर्जी प्रमाणपत्र, एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग और सरकारी लाभ लेने के आरोपों पर प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है।
