बिहार में फार्मर आईडी के बिना खाद मिलना मुश्किल, किसानों के सामने गहराया संकट
Bihar Fertilizer Subsidy: बिहार में फार्मर आईडी कार्ड के बिना किसानों को खाद मिलने में गंभीर संकट का सामना करना ...और पढ़ें

खाद-बीज विक्रेता संघ की बैठक में डीलरों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसानों का पंजीकरण नहीं कराया गया तो खाद वितरण ठप हो सकता है।
संवाद सहयोगी, कुशेश्वरस्थान (दरभंगा)। Bihar Farmer ID: जिले के कुशेश्वरस्थान में फार्मर आईडी से वंचित किसानों के सामने आगामी फसल चक्र में उर्वरक खरीद का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
सोहरबाघाट में आयोजित खाद-बीज विक्रेता संघ की बैठक में डीलरों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर जल्द ही किसानों का पंजीकरण नहीं कराया गया तो खाद वितरण ठप हो सकता है।
दोनों प्रखंडों के संघ अध्यक्षों ने कृषि पदाधिकारियों से शिविर लगाकर शेष किसानों का कार्ड तुरंत बनवाने की मांग की है।
आधे किसान आईडी से वंचित
बैठक की अध्यक्षता कर रहे संघ के पश्चिमी प्रखंड अध्यक्ष गुरु चरण पूर्वे ने कहा कि क्षेत्र के करीब 50 प्रतिशत किसानों के पास अब तक फार्मर आईडी कार्ड उपलब्ध नहीं है।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद बिना आईडी के पॉश मशीनों से अनुदानित उर्वरक मिलना संभव नहीं होगा। ऐसे में बुआई के पीक सीजन में बड़ी संख्या में किसानों को खाद से वंचित रहना पड़ सकता है, जिससे फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
विक्रेताओं ने उठाई मांगें
बैठक में खुदरा विक्रेताओं ने किसानों को निर्धारित दर पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने के लिए थोक स्तर से सही कीमत पर माल देने की वकालत की। इसके साथ ही उर्वरक के साथ अन्य अवांछित उत्पादों की जबरन टैगिंग बंद करने और गोदाम तक सीधे डिलीवरी देने का मुद्दा उठाया गया।
डीलरों का कहना था कि प्रशासनिक स्तर पर त्वरित पहल न होने से आने वाले दिनों में दुकानों पर भारी हंगामे और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है।
क्या है फार्मर आईडी
केंद्र सरकार के एग्रीस्टैक डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत किसानों की 11 या 12 अंकों की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान तैयार की जा रही है।
इसे कृषि क्षेत्र का डिजिटल आधार माना जा रहा है, जिसमें किसान का व्यक्तिगत डेटा, बैंक खाता और भू-अभिलेख पूरी तरह लिंक रहते हैं। जिसके नाम पर कृषि योग्य भूमि या जमाबंदी दर्ज है अथवा जो डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत हैं, वे इसका लाभ ले सकते हैं।
खाद से सीधा कनेक्शन
सरकार उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध तस्करी रोकने के लिए बिक्री को पूरी तरह फार्मर आईडी से जोड़ रही है। पॉश मशीन पर आईडी दर्ज होते ही किसान के भू-अभिलेख के आधार पर निर्धारित वैज्ञानिक कोटे के अनुसार ही खाद जारी होगी।
इससे गैर-किसानों या औद्योगिक इकाइयों द्वारा सब्सिडी वाले उर्वरकों की अवैध खरीद पर पूरी तरह लगाम लगेगी और केवल वास्तविक जोतदारों को सामग्री मिल सकेगी।
जमीन पर तकनीकी अड़चनें
आईडी निर्माण के दौरान किसानों को तकनीकी स्तर पर काफी गंभीर मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या आधार कार्ड और राजस्व खतियान में दर्ज नाम की स्पेलिंग में अंतर होने के कारण ई-केवाईसी फेल होने की है।
इसके अलावा पूर्वजों के नाम दर्ज पुरानी जमाबंदियों का बंटवारा या म्यूटेशन न होने और ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वर या ओटीपी विफलता से भी प्रक्रिया लगातार बाधित हो रही है।
