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दरभंगा में जहां ठहरते थे बड़े नेता, वहां अब लगता है जुआरियों का जमावड़ा

Published: Fri, 12 Jun 2026 03:44 PM (IST)

दरभंगा का ऐतिहासिक बहेड़ा डाकबंगला, जो अंग्रेजों के जमाने का है और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ा है, आज बदहाली का ...और पढ़ें

बहेड़ा डाक बंगला। जागरण

बहेड़ा डाक बंगला। जागरण

HighLights

  1. अंग्रेजों के जमाने का बहेड़ा डाकबंगला बदहाली का शिकार।

  2. महात्मा गांधी, नेहरू जैसे नेताओं का हुआ था आगमन।

  3. जिला परिषद अध्यक्षा ने संरक्षण का दिया आश्वासन।

संवाद सहयोगी, बेनीपुर (दरभंगा) । अंग्रेजों के जमाने में निर्मित बहेड़ा डाकबंगला आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है। जिला परिषद दरभंगा के अधीन यह ऐतिहासिक भवन उपेक्षा का शिकार हो चुका है।

स्थिति इतनी खराब हो गई है कि डाकबंगला की लगभग तीन बीघा खाली जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमणकारियों का कब्जा बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम ढलते ही यहां जुआरियों का जमावड़ा लगने लगता है, जबकि प्रशासन सब कुछ जानकर भी मौन बना हुआ है।

स्थानीय निवासी प्रवीण कुमार झा, मो. मुन्ना, मो. शौकत, संतोष झा, रामदयाल झा, गुणाकर झा और रामफल मिश्र सहित कई लोगों का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और आचार्य विनोबा भावे जैसे महान हस्ती का इस डाक बंगले में आगमन हो चुका है।

यहां देश के भविष्य और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता था।स्वतंत्रता के बाद भी कई वर्षों तक बड़े सरकारी अधिकारियों का इस डाक बंगले में ठहराव होता रहा, लेकिन पिछले करीब 20 वर्षों से इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है।

जिला परिषद के अधीन है डाकबंगला

बहेड़ा डाकबंगला वर्षों से जिला परिषद दरभंगा के अधीन है। बेनीपुर नगर परिषद के गठन को 13 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिला परिषद द्वारा अब तक इस संपत्ति का हस्तांतरण नगर परिषद को नहीं किया गया है।

नगर परिषद के मुख्य पार्षद मो. अकबाल का कहना हैं कि डाक बंगले को नगर परिषद के अधीन कराने के लिए जिला परिषद दरभंगा को कई बार पत्र भेजा गया है। बावजूद इसके अब तक हस्तांतरण नहीं हो सका है।

इसके कारण डाक बंगले की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है जिला परिषद अध्यक्षा रेणु देवी ने कहा कि हाल ही में कार्यभार संभाला है।

बहेड़ा डाकबंगला जिला परिषद के अधीन है और यह एक ऐतिहासिक धरोहर है। इसकी सुरक्षा और संरक्षण करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।

डाक बंगले की स्थिति का आकलन कर इसके संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।