दरभंगा। मधुबनी बालिका गृह में प्रस्तुत की गईं दो बालिकाओं को वापस करना अधीक्षक को महंगा पड़ा है। किशोर न्याय बोर्ड ने इसे गंभीरता से लिया है। मजिस्ट्रेट अश्वनी कुमार ने अधीक्षक रूपम कुमारी से मामले में स्पष्टीकरण पूछा है। 15 दिनों में बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देने को कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर उच्च न्यायालय मूल्यांकन समिति और समाज कल्याण विभाग को विधि संगत कार्रवाई करने के लिए अनुशंसा करने की चेतावनी दी है। बिना युक्ति के विधि संगत विचार किए बालिका को वापस करने में बोर्ड की ओर से जारी आदेश में कई आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि 19 जनवरी को रेल थाना ने दो बालिकाओं को बालिका गृह में रखने के लिए प्रस्तुत किया। लेकिन, अधीक्षक ने प्रपत्र चार में बालिका को नहीं रखने की बात का उल्लेख कर उसे वापस कर दिया। इसका कोई कारण न तो बोर्ड को और न ही रेलवे सुरक्षा कर्मी को दिया गया। इसकी सूचना रेलवे थाने के दारोगा पंकज कुमार ने अगले दिन बोर्ड में उपस्थित होकर दी। बोर्ड ने कहा है कि बालिका को केंद्र में नहीं रखना किशोर न्याय अधिनियम के वर्णित चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट के कार्य दायित्व का घोर उल्लंघन व बाल अधिकार का हनन है। -

Posted By: Jagran

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