दरभंगा। संत शिरोमणि रविदास की 643 वीं जयंती ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में मनाई गई। लोगों को संबोधित करते हुए मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि समाज के बदलाव में गुरु रविदास की वाणी आज भी प्रासंगिक है। गुरु रविदास ने जो सामाजिक संघर्ष को 600 वर्ष पूर्व करने का काम किया, उसको आज के दौर में आत्मसात करना उनके महत्व को स्थापित करना है। यह सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण है। समारोह को संबोधित करते हुए उप कुलसचिव प्रो. सुरेंद्र सुमन ने कहा कि गुरु रविदास के दोहे मोही-मोही तो ही अंतर कैसा.. के महत्व को समाज में स्थापित करने की जरूरत है। आज के दौर में महापुरुषों के विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। सेवानिवृत्त जिला शिक्षा पदाधिकारी दिनेश साहू ने कहा कि दलित समाज के खिलाफ किसी भी तरह के भेदभाव को मजबूती से मिलकर संघर्ष करने की जरूरत है। समाजसेवी विजय प्रसाद ने कहा कि रविदास की वाणी मन चंगा तो कठौती में गंगा महत्वपूर्ण है। डॉ. अंजू अग्रवाल ने लड़कियों के शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शिक्षित बने बिना समाज का हित नहीं किया जा सकता है। बहादुरपुर के पूर्व प्रमुख हरी पासवान ने कहा कि रविदास सेवा संघ हमेशा दलितों के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रही है।

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शिक्षा से ही समाज का होगा विकास : बलराम

जयंती समारोह में अध्यक्षीय भाषण देते हुए रविदास सेवा संघ के अध्यक्ष बलराम राम ने कहा रविदास समाज को शिक्षा पर मजबूती से ध्यान देने की जरूरत है। शिक्षा से ही समाज का विकास होगा। साथ ही उन्होंने कुलपति से मांग की कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अंबेडकर चेयर की स्थापना की जाए। कार्यक्रम को लोजापा जिला अध्यक्ष गगन कुमार झा, हम के जिला अध्यक्ष आरके दत्ता, समाजसेवी प्रमोद चौधरी, शिक्षक नेता रंजीत राम, सुनील मेहरा, जितेंद्र कुमार, संतोष राम, डॉ. चंदा कुमारी, राकेश राम, किरण कुमारी, गंगाराम, अशर्फी राम, अशोक राम, रामजीवन, राम मुरारी बैठा, शंभू राम, अरुण राम, मुन्ना राम सहित दर्जनों ने संबोधित किया। मंच संचालन रंजीत राम ने किया।

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Posted By: Jagran

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