दरभंगा। जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत जिले में स्थित प्राकृतिक जलस्त्रोतों की पहचान कर इनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है। साथ ही नए जलस्त्रोतों का सृजन करने की दिशा में भी कार्रवाई चल रही है। डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने सभी संबंधित एजेंसियों को प्राकृतिक जलस्त्रोतों के जीर्णोद्धार व नए जलस्त्रोतों के सृजन कार्यों का तीव्र गति से क्रियान्वयन करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान में कुल 10 अवयव हैं। सभी अवयवों में राज्य स्तर पर जिले की रैकिग की जा रही है। दरभंगा जिला की रैकिग को सुधारने के लिए सभी अवयवों में प्रगति लानी होगी। वे कार्यालय प्रकोष्ठ में जल-जीवन-हरियाली अभियान की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे। कहा कि सभी सार्वजनिक एवं निजी जलस्त्रातों की पहचान कर इसका जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए कुंआ-तालाब आदि का भौतिक सर्वेक्षण करने का निदेश सभी बीडीओ, सीओ, मनरेगा पीओ एवं पीएचईडी को दिया गया था। सर्वेक्षण प्रतिवेदन की समीक्षा में पाया गया कि अनुमानित जलस्त्रोतों की संख्या से इसमें कम संख्या प्रतिवेदित हुए हैं। डीएम ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को पुन: तीन दिनों के अंदर अंतिम रूप से सभी सार्वजनिक एवं निजी कुंओं का सर्वेक्षण कर अंतिम प्रतिवेदन समर्पित करने का निर्देश दिया है। कहा कि भौतिक सर्वेक्षण प्रतिवेदन में राजस्व विभाग के अभिलेख से मिलान कर ली जाए। बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित कुओं का जीर्णोद्धार लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल द्वारा किया जाएगा। जबकि, नगर निकाय क्षेत्र के कुओं का जीर्णोद्धार नगर विकास विभाग के द्वारा किया जाना है। डीडीसी डॉ. कारी प्रसाद महतो ने बताया कि चापाकल-कुआं एवं अन्य जलस्त्रोतों के निकट सोख्ता बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। बताया कि 2437 सोख्ता का निर्माण पूर्ण हो गया है। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि 36 कुंओं का जीर्णोद्धार पूरा कर दिया गया है और वर्तमान में 55 कुंओं का जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ किया गया है। डीएम ने कार्यपालक अभियंता को और 288 चिन्हित कुंओं का जीर्णोद्धार प्रारंभ करने का निर्देश दिया है। कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल्य टोलों में प्राथमिकता के आधार पर कुंओं का जीर्णोद्धार किया जाए। कहा कि लघु सिचाई प्रमंडल के द्वारा एक एकड़ से अधिक रकबा वाले तालाबों का जीर्णोद्धार कार्य किया जा रहा है एवं एक एकड़ से कम वाले तालाबों का जीर्णोद्धार मनरेगा योजना के तहत किया जा रहा है। जल-जीवन-हरियाली अभियान का एक अहम पार्ट वर्षाजल का संचयन है। इसके तहत वर्तमान में सरकारी भवनों में छत वर्षा जल संचयन संयत्र लगाने का कार्य प्रगति में है। कार्यपालक अभियंता, भवन संरचना प्रमंडल ने बताया कि तीन हजार वर्ग फीट व इससे अधिक क्षेत्रफल वाले सरकारी भवनों में छत वर्षाजल संचयन का कार्य किया जा रहा है। इसमें 142 भवनों में से 119 सरकारी भवनों में छत वर्षा जल संचयन संयत्र संस्थापित कर दिया गया है। मनरेगा योजना के तहत 121 भवनों में छत वर्षा जल संचयन संयत्र संस्थापित किया गया है। बैठक में डीडीसी डॉ. कारी प्रसाद महतो, अपर समाहर्ता विभूति रंजन चौधरी, डीपीओ (शिक्षा) संजय देव कन्हैया, जिला जन संपर्क पदाधिकारी सुशील कुमार शर्मा, जिला कृषि पदाधिकारी समीर कुमार, डीपीएम जीविका मुकेश कुमार, प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश गुप्ता, कार्यपालक अभियंता, भवन संरचना प्रमंडल दिलीप कुमार समेत विभिन्न विभागों के कार्यपालक अभियंता मौजूद थे।

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Posted By: Jagran

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