बक्सर । अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न मार्गों पर चलने वाले खटारा वाहनों की भरमार है। ये वाहन वातावरण में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात की चिमनी भट्ठा की तरह धुआं उगल रहे वाहनों की तरफ किसी का ध्यान नही जाना चिता का विषय बना हुआ है। इन दिनों क्षेत्र में दिल्ली, उतर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से कम लागत खर्च में कबाड़ा वाहन लाने की होड़ मची है। वैसे वाहन जिन्हें वहां के प्रशासन द्वारा रिजेक्ट कर उनके परिचालन पर रोक लगा दी गई है, वैसे वाहनों की यहां खूब मांग है, क्योंकि यहां के प्रशासनिक तंत्र को प्रदूषण से कोई लेना-देना नहीं है। इन खटारा वाहनों के स्टार्ट होते ही आसपास का वातावरण धुएं से भर जाता है। वहीं, इस पर सफर करने वाले यात्रियों को पूरे रास्ते मुंह पर रूमाल रखकर मंजिल तय करना लाचारी होती है। जहां ग्लोबल वार्मिग की समस्या से लोगो में हडकंप मचा हुआ है। वहीं, प्रशासन की अनदेखी से खटारा वाहन अनुमंडल के सड़कों पर सरपट दौड़ रहे हैं। यही नहीं, इन वाहनों से प्रत्येक दिन देश के कर्णधार नन्हे-मुन्ने बच्चों को ढोया जाता है। इस संदर्भ में डॉ.नीरज कहते हैं कि ऐसे धुंआ उगल रहे वाहनों से वातावरण प्रदूषित होता है। साथ ही, इससे लोग विषाक्त बीमारियों की चपेट में भी आ जाते हैं।

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