बक्सर : गेहूं की अधिप्राप्ति पर संक्रमण का साया पड़ गया है, जिसकी वजह से सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है। सरकारी सिस्टम के कोरोना से जूझने के कारण किसानों को इस बार गेहूं का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। गल्ला व्यवसायी किसानों को ब्लैकमेल कर रहे हैं और उपज की कीमत कम दे रहे हैं। डीजल की कीमतों में वृद्धि के कारण इस साल खेती में लागत खर्च बढ़ गया था और अब उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान परेशान हैं।
सरकारी फरमान के अनुसार 20 अप्रैल से खरीदारी शुरू किया जाना था, लेकिन आज तक किसी भी किसान का गेंहू सरकारी क्रय केंद्र पर नही खरीदा गया है। ऐसे में व्यापारी औने-पौने दामो में गेहूं खरीद कर अपना गोदाम भर रहे हैं। घरेलू खर्च और खरीफ की खेती की तैयारी के लिए किसान कम कीमत पर ही गेहूं बेचने को मजबूर हैं। सरकारी खरीद की उम्मीद कम होने से सीधे खरीद करने वाले व्यापारियों ने भी दाम कर दिए हैं। गौरतलब हो कि कटाई के समय किसानों के दरवाजे पर ही प्रति क्विटल 1680 रुपये तक का भाव मिल जा रहा था। तब बहुत किसानों ने सरकारी खरीद शुरू होने और भाव अच्छा मिलने की उम्मीद में गेहूं का सौदा नहीं किया और अपने घरों में भण्डारण कर लिया। अब गेहूं का भाव 70 रुपये प्रति क्विटल घटकर 1610 रुपये प्रति क्विटल हो गया है। ऐसे में किसानों का दुख दर्द समझने वाला कोई रहनुमा दिख नही रहा है। इधर, पैक्स के माध्यम से गेहूं का खरीद मूल्य 1975 रुपये तय किया गया है। बसाव खुर्द के किसान श्रीकांत ओझा, पसहरा के जयराम चौहान और खेखसी के बबन सिंह सहित अन्य ने बताया कि सरकारी खरीदारी शुरू नही होने से किसानों की समस्या गम्भीर बन गयी है। सस्ते दामों पर गेहूं बेचने से खेती का खर्चा भी नही निकल पा रहा है।






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