बक्सर । नगर समेत जिले के विभिन्न गांवों में स्थित शिवालयों तथा मंदिरों में बुधवार को महिलाओं ने हरितालिका तीज व्रत पर कथा अनुश्रवण कर पति के सलामती की प्रार्थना की। नगर के रामरेखा घाट, पतालेश्वर मंदिर, नाथ बाबा घाट, सदर प्रखंड कालोनी शिव मंदिर, गौरी-शंकर मंदिर आदि समेत डुमरांव के बांके बिहारी मंदिर, लाला टोली रोड स्थित राजराजेश्वरी मंदिर, छठिया पोखरा शिवमंदिर, राजेश्वर मंदिर, ठठेरी बाजार और निमेज टोला मंदिर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर कथा श्रवण की।

वहीं, इटाढ़ी के शिवमंदिर, ठाकुरबाड़ी, पूर्ब टोला बुढ़वा शिव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में तीज की कथा सुनने के लिए महिलाओं की भीड़ जुटी रही। जहां, कथा सम्पन्न होने के बाद कर्मकांडियों को महिलाओं ने दान-पुण्य किया। सभी व्रती महिलाएं गुरुवार की सुबह पारण करेंगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हरितालिका तीज का व्रत भगवान शंकर एवं माता पार्वती से जुड़ा हुआ है। यह व्रत करने के बाद माता पार्वती को देवाधिदेव महादेव की प्राप्ति हुई थी। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति के दीर्घायु होने के लिए तीज व्रत करती हैं। वहीं, बेहतर जीवनसाथी की मनोकामना पूर्ण होने के लिए कुंवारी कन्याएं भी व्रत करती हैं। पतालेश्वर मंदिर के रामेश्वरनाथ पंडित ने बताया कि जिन सुहागन बहनों को ससुराल में कोई तकलीफ हो वे भी आज एक समय दूध-रोटी का पारण कर व्रत रखती हैं। इस बाबत आचार्य मुक्तेश्वर शास्त्री ने बताया की ऐसी सुहागन महिलाओं को भाद्रपद शुक्लपक्ष तृतीय के अलावा कम से कम माघ एवं वैसाख के शुक्लपक्ष की तृतीया को भी व्रत रखना चाहिए। इसमें नमक खाना वर्जित है। आचार्य ने बताया कि शास्त्रों में यह वर्णन मिलता है कि इस प्रकार का व्रत वशिष्ठ जी की पत्नी अरुंधति ने किया था। उन्होंने बताया कि चन्द्रमा की पत्नी ने भी इस प्रकार का व्रत किया था।

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