बक्सर : कोपवां के प्रदीप अपने क्षेत्र में स्कूल चलाते थे, इस स्कूल में साढ़े तीन सौ बच्चे पढ़ते थे, घर का खर्च चल जाता था। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के बाद रोजी रोटी के लिए जिस जमीन में स्कूल चलता था, वहीं पर मशरूम उगाने लगे। नया काम चल निकला और अच्छी आमदनी होने लगी।

अब मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में नजीर बन गए और किसानों को पाठशाला लगा प्रशिक्षित कर रहे है। प्रदीप कहते है कि स्कूल संचालन के बदौलत यहां दर्जन भर शिक्षकों का भरण पोषण होता था, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण को लेकर स्कूल बंद हो जाने के बाद मैं हमेशा सोचता था कि कुछ ऐसा करूँ, जिससे मैं अपने साथ दूसरे लोगों का भी सहारा बन सकूं। उसी निजी स्कूल के एक कमरे में मशरूम की खेती शुरू की। आज बेहतर उत्पादन को देखने के लिए लोग आते है।

जीने का सहारा बनी मशरूम की खेती

प्रदीप के प्रयास से कई किसान मशरूम की खेती कर स्वावलंबी बन रहे है। बक्सर और आरा समेत यूपी के सीमावर्ती जिलों में मशरूम की मांग भी अच्छी है। किसान अपना उत्पाद आसपास के बाजारों में पहुंचा कर अच्छी आमदनी कर रहे है। अभी एक दर्जन से अधिक किसान इलाके में सफलता पूर्वक मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं।

पंद्रह दिन बाद होता है अंकुरित

मशरूम की खेती शुरू करने वाले युवक प्रिस कुमार का कहना कि बुआई के 15 दिनों बाद अंकुर आना शुरू हो जाता हैं। अंकुर आने के बाद खेती में स्प्रे पंप से एक दिन बीच लगाकर पानी देते हैं और कुछ ही दिनों में यह बिकने के लायक हो जाता है।

दवा के तौर पर उपयोगी है मशरूम

डुमरांव नगर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मशरूम में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। यह शाकाहारी परिवारों के लिए बहुत फायदेमंद है। प्रति व्यक्ति एक सौ ग्राम प्रतिदिन मशरूम का सेवन करने से ह्रदय रोग का खतरा कम हो जाता है। यह मधुमेह को नियंत्रित करता है।

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