विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बक्सर में 55 साल तक सरकारी रिकॉर्ड से गायब रही 345 बीघा जमीन, अब जागा विभाग

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:25 PM (IST)

बिहार के ब्रह्मपुर अंचल में 55 साल से राजस्व रिकॉर्ड से गायब सुघर छपरा मौजा की 345 बीघा जमीन अब दर्ज कर ली गई है।

बक्सर में 55 साल तक सरकारी रिकॉर्ड से गायब रही 345 बीघा जमीन, अब जागा विभाग (AI Generated Image)

बक्सर में 55 साल तक सरकारी रिकॉर्ड से गायब रही 345 बीघा जमीन, अब जागा विभाग (AI Generated Image)

HighLights

  1. राजस्व रिकॉर्ड से 55 साल तक 345 बीघा जमीन गायब।

  2. किसानों को लगान रसीद कटवाने में दशकों से थी समस्या।

  3. सर्वे विभाग की पहल पर अब रिकॉर्ड में हुई दर्ज।

संवाद सहयोगी, ब्रह्मपुर (बक्सर)। बिहार-उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में राजस्व विभाग की एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है और इस चूक का खामियाजा किसानों को वर्षों तक मुकदमे के रूप में झेलना पड़ा।

ब्रह्मपुर अंचल की उत्तरी नैनीजोर पंचायत स्थित सुघर छपरा नामक राजस्व मौजा वर्षों तक अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड से गायब रहा। नतीजा यह हुआ कि करीब 345 बीघा पुश्तैनी जमीन पर किसानों को लगान रसीद कटवाने के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े।

अब सर्वे विभाग की पहल पर सुघर छपरा मौजा को राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया है। इसके साथ ही ब्रह्मपुर अंचल के रिकॉर्ड में एक मौजा की बढ़ोतरी हो गई।

उत्तरी नैनीजोर पंचायत में 345 बीघा की रकबा वाला सुघर छपरा मौजा किसानों की पुश्तैनी जमीन है, लेकिन 1970 में रिविजनल सर्वे के बाद इस मौजा की जमाबंदी ब्रह्मपुर के अंचल कार्यालय में कायम नहीं की गई।

जमीन पर किसानों का दावा था और वे अभी भी खेती कर रहे हैं, लेकिन अंचल कार्यालय इसे अपने विभाग का मौजा मानने से सीधे इनकार करता रहा था। लगभग 55 वर्षों से दौड़ लगा रहे किसानों की लगान रसीद अब तक नहीं कट रही थी।

सीमा विवाद में बिहार को मिला यह मौजा

बिहार-यूपी सीमा विवाद को हल करने के लिए गठित त्रिवेदी आयोग ने सुधर छपरा मौजा भोजपुर जिले के हिस्से में दे दिया। उसके बाद जमीन पर दावा करने वाले यूपी के किसान न्यायालय में भी मुकदमा हार गए। सीमा विवाद के कारण 1970 में नैनीजोर के सीमावर्ती इलाके का रिविजनल सर्वे नहीं हुआ।

उस समय बक्सर भोजपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था। भूस्वामी सत्यदेव तिवारी बताते हैं कि 1972 तक उन लोगों द्वारा लगान रसीद कटाया गया था, लेकिन सर्वे के बाद इस जमीन की जमाबंदी अंचल में नहीं की गई।

कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2015 में तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा लगान तय करने की रिपोर्ट भूमि सुधार उप समाहर्ता, डुमरांव को भेजने के बाद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और न लगान रसीद काटा गया।

वे लोग सरकार को लगान देने के लिए तैयार है, लेकिन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को लगान वसूली में दिलचस्पी नहीं है

दियारे में हो रहा लाखों रुपये राजस्व का नुकसान

लगभग 55 वर्षों से लंबित इस मामले में न्यायालय के आदेश और सर्वे विभाग की पहल के बाद सुघर छपरा मौजा को राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया, लेकिन लगान रसीद के लिए लापरवाह अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड को ठीक भी नहीं किया गया।

लगभग 55 वर्षों से बकाया 345 बीघा खेत की लगान वसूली की प्रक्रिया अभी भी फाइलों में धूल फांक रही है। विभाग की लापरवाही से कई तरह की समस्या उत्पन्न हो रही है और सर्वे का काम भी प्रभावित होगा।

अब 110 के बदले 111 मौजों का होगा सर्वे

किसानों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच पड़ताल करने के बाद विभाग को रिपोर्ट भेजी गई। इसके बाद सुघर छपरा मौजा को राजस्व रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया। नया मौजा जुड़ने से ब्रह्मपुर में 110 के बदले 111 मौजे का सर्वे कार्य किया जाएगा। - सुधांशु सिंह, सर्वे प्रभारी, ब्रह्मपुर